Nirjala Ekadashi 2026 : सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत भगवान विष्णु की पूजा और आराधना के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि एकादशी व्रत का संबंध केवल भगवान विष्णु से ही नहीं, बल्कि एकादशी माता से भी जुड़ा हुआ है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी माता का प्राकट्य स्वयं भगवान श्रीहरि विष्णु के दिव्य तेज से हुआ था। भगवान विष्णु ने उन्हें यह वरदान दिया था कि जो भी श्रद्धालु उनके प्राकट्य दिवस पर विधि-विधान से व्रत करेगा, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाएंगे और अंत में उसे विष्णु लोक की प्राप्ति होगी।
मुर राक्षस के आतंक से परेशान थे देवता
पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, प्राचीन काल में मुर नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली राक्षस था। उसने अपने बल और पराक्रम के दम पर देवताओं को पराजित कर स्वर्ग लोक पर अधिकार कर लिया था। मुर के अत्याचारों से परेशान होकर देवराज इंद्र सहित सभी देवता भगवान शिव की शरण में पहुंचे।
भगवान शिव ने देवताओं को भगवान विष्णु से सहायता मांगने की सलाह दी। इसके बाद सभी देवता वैकुंठ पहुंचे और भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना की। देवताओं की विनती सुनकर भगवान विष्णु गरुड़ पर सवार होकर मुर के राज्य चंद्रावती पहुंचे और राक्षसों की विशाल सेना का संहार कर दिया।
भगवान विष्णु के तेज से प्रकट हुईं देवी
सेना के नष्ट होने के बाद मुर स्वयं युद्ध के मैदान में उतरा। भगवान विष्णु और मुर के बीच लंबे समय तक भयंकर युद्ध हुआ। युद्ध के दौरान भगवान विष्णु कुछ समय के लिए विश्राम करने एक गुफा में चले गए। तभी मुर वहां पहुंच गया और भगवान विष्णु पर हमला करने का प्रयास किया।
कथा के अनुसार, जैसे ही मुर भगवान विष्णु पर प्रहार करने वाला था, उसी समय भगवान के दिव्य तेज से एक तेजस्वी देवी प्रकट हुईं। देवी के हाथों में अनेक दिव्य अस्त्र-शस्त्र थे। उन्होंने मुर राक्षस से युद्ध किया और कुछ ही समय में उसका वध कर दिया।
भगवान विष्णु ने दिया मोक्ष का वरदान
जब भगवान विष्णु निद्रा से जागे तो उन्होंने मुर का वध हुआ देखा और देवी की वीरता से अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने देवी से वरदान मांगने को कहा। तब देवी ने प्रार्थना की कि जिस तिथि को उनका प्राकट्य हुआ है, उस दिन जो भी श्रद्धालु श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत करेगा, उसके सभी पाप नष्ट हो जाएं तथा उसे पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति हो।
भगवान विष्णु ने देवी की प्रार्थना स्वीकार कर उन्हें यह वरदान प्रदान किया। तभी से देवी को ‘एकादशी माता’ के नाम से जाना जाने लगा और एकादशी व्रत की परंपरा प्रारंभ हुई। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु और एकादशी माता दोनों की कृपा प्राप्त होती है।

More Stories
The Origin of Lord Brahma : सृष्टि की शुरुआत का वो रहस्य, जब भगवान विष्णु की नाभि से निकले कमल पर प्रकट हुए जगत पिता ब्रह्मा
Ratna Shastra : इन रत्नों को धारण करने से मिलती है मां लक्ष्मी की कृपा, बढ़ती है धन-समृद्धि
Nirjala Ekadashi 2026 : बिना पानी के रखा जाने वाला महाव्रत 25 जून को, महापुण्य की प्राप्ति के लिए राशिनुसार जरूर करें ये दान