MMDR Amendment Bill 2026 : नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026। देश के खनन और खनिज क्षेत्र से जुड़ा एक बड़ा विधायी बदलाव सामने आया है। संसद के मानसून सत्र में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने लोकसभा में ‘माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ पेश किया है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य खनिज अधिकारों पर लगने वाले अतिरिक्त टैक्स, सेस और लेवी को लेकर राज्यों के अधिकारों को स्पष्ट करना है।
अगर यह बिल कानून का रूप लेता है, तो राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों पर अलग से अतिरिक्त टैक्स, सेस या लेवी लगाने की व्यवस्था पर रोक लग सकती है। केंद्र सरकार का तर्क है कि इससे देशभर में खनिजों से जुड़े शुल्कों में एकरूपता आएगी और कारोबार के लिए अधिक स्थिर माहौल तैयार होगा।
क्यों लाया गया MMDR Amendment Bill?
केंद्र सरकार के मुताबिक अलग-अलग राज्यों में खनिजों पर अतिरिक्त टैक्स और लेवी लगाने से खनिजों की लागत में अंतर पैदा होता है। इसका असर उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य ऐसी क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना है।
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इसके साथ ही घरेलू स्तर पर खनिजों की उपलब्धता और आपूर्ति को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि स्पष्ट और समान नियमों से खनन क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है।
राज्यों की कमाई पर क्या होगा असर?
खनिज संपदा वाले राज्यों के लिए यह प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खनन से मिलने वाली रॉयल्टी और अन्य निर्धारित राजस्व के अलावा यदि राज्यों को अतिरिक्त लेवी लगाने की अनुमति सीमित होती है, तो उनके राजस्व ढांचे पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
यही वजह है कि बिल के प्रावधानों को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच चर्चा की संभावना भी बढ़ गई है। खासकर खनिज उत्पादन वाले राज्यों के लिए यह मुद्दा आर्थिक और नीतिगत दोनों दृष्टि से अहम है।
उद्योगों को मिल सकता है फायदा
केंद्र सरकार का मानना है कि अलग-अलग राज्यों में अतिरिक्त शुल्कों की व्यवस्था से खनिज आधारित उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। एक समान व्यवस्था लागू होने पर कंपनियों के लिए लागत का अनुमान लगाना आसान होगा।
इससे खनन, धातु, ऊर्जा और अन्य खनिज आधारित उद्योगों में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार इसे घरेलू खनिज आपूर्ति को मजबूत करने और देश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।

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