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अब बेल आवेदन में क्या-क्या बताना होगा?
नई अधिसूचना के मुताबिक जमानत मांगने वाले आरोपी को अपने खिलाफ दर्ज मामलों का पूरा ब्यौरा देना होगा। अदालत यह भी जानना चाहेगी कि आरोपी पहले किसी मामले में बेल पर है या नहीं। कानूनी जानकारों का कहना है कि इससे अदालत को किसी आरोपी की पृष्ठभूमि समझने में आसानी होगी। रायपुर स्थित हाईकोर्ट परिसर में मंगलवार सुबह से ही अधिवक्ताओं के बीच इस बदलाव की चर्चा होती रही। कोर्ट के गलियारों में फाइलों के साथ तेज कदमों से चलते वकील नई अधिसूचना की कॉपी पढ़ते नजर आए।
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पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश
हाईकोर्ट का मानना है कि कई मामलों में अधूरी जानकारी के आधार पर जमानत याचिकाएं दाखिल हो जाती थीं। इससे सुनवाई प्रभावित होती थी। अब विस्तृत जानकारी अनिवार्य होने से अदालत के सामने पूरी तस्वीर रहेगी। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला केवल प्रक्रिया बदलने तक सीमित नहीं है। इसका असर आने वाले समय में जमानत सुनवाई की गति और गुणवत्ता दोनों पर दिख सकता है। खासतौर पर गंभीर अपराधों में अदालत अब पुराने रिकॉर्ड को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से देख सकेगी।
वकीलों और पक्षकारों पर बढ़ेगी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। गलत जानकारी या तथ्य छिपाने की स्थिति में याचिका प्रभावित हो सकती है। कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मानना है कि इससे अदालत में फर्जी या अधूरी जानकारी देने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।

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