नई दिल्ली। अमेरिकी सरकार ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम (H-1B Visa Program) के संभावित दुरुपयोग को लेकर बड़ी कार्रवाई शुरू की है। अमेरिकी श्रम विभाग (Department of Labor – DOL) ने इस संबंध में कम से कम 175 कंपनियों के खिलाफ जांच शुरू की है।
सरकार का कहना है कि कुछ कंपनियाँ तकनीक और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में विदेशी पेशेवरों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे अमेरिकी नागरिकों के रोजगार पर असर पड़ सकता है। DOL ने सोशल मीडिया के माध्यम से चेतावनी जारी करते हुए कहा कि अमेरिकी कंपनियों को पहले स्थानीय नागरिकों को नौकरी का अवसर देना चाहिए।
‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ के तहत होगी जांच
अमेरिकी श्रम विभाग ने इस जांच को ‘प्रोजेक्ट फायरवॉल (Project Firewall)’ नाम दिया है। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियोक्ता अमेरिकी नौकरी बाजार की रक्षा कर रहे हैं और स्थानीय कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि यदि किसी कंपनी को H-1B नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी — जिसमें जुर्माना, वीज़ा प्रतिबंध और भविष्य में प्रायोजन पर रोक जैसी सज़ाएँ शामिल हो सकती हैं।
ट्रंप प्रशासन की सख्ती का असर
यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशासनिक नीतियों का हिस्सा है, जिसमें ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) एजेंडा को बढ़ावा दिया जा रहा है। ट्रंप सरकार ने हाल ही में आप्रवासन सुधार (Immigration Reform) और नौकरी संरक्षण (Job Protection) के लिए कई नए फैसले लिए हैं।
सरकार का कहना है कि अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने से पहले कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उस पद के लिए कोई स्थानीय उम्मीदवार उपलब्ध नहीं था।

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