दंडकारण्य के घने जंगलों में माओवादियों के लिए गुप्त रूप से इलाज करने वाले डॉक्टर की कहानी अब उजागर हुई है। लंबे समय तक गुमनाम रहने वाले इस डॉक्टर को माओवादियों ने ‘डॉ. रफीक’ के नाम से जाना।
माओवादी शिविरों में टॉर्च की रोशनी में घातक घावों का इलाज करने वाला यह सर्जन अब अपने असली नाम मंदीप के साथ सामने आया है। पंजाब से MBBS की डिग्री प्राप्त करने वाले मंदीप अकेले ऐसे उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति थे, जिन्होंने दंडकारण्य के जंगल में कई माओवादियों की जान बचाई।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने खुलासा किया कि मंदीप ने घायलों की जान बचाने के लिए कई बार जोखिम भरे ऑपरेशन किए। उसके हौसले और निस्वार्थ सेवा की वजह से उसे जंगल में ‘डॉ. रफीक’ के नाम से जाना गया।
खुफिया फाइलों में भी मंदीप के बारे में कम जानकारी उपलब्ध है, लेकिन अब माओवादी संगठन से जुड़े लोगों के खुलासों ने उसकी वीरता और योगदान को सार्वजनिक किया है।

More Stories
CG BREAKING : रायपुर में गांजा तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, DRI ने पकड़ा गांजा से भरा ट्रक
ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा पर माओवादियों का बड़ा डंप बरामद, भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक जब्त
ट्रांसपोर्ट कारोबारी के यहां स्टेट GST का छापा’ दूसरे दिन 9 घंटे चली जांच, कंप्यूटर और पुराने रिकॉर्ड खंगाले, BSP और दो सीमेंट फैक्ट्रियों के मिले वर्क ऑर्डर