अयोध्या: धर्मनगरी अयोध्या में आज रामनवमी के पावन अवसर पर एक बार फिर त्रेतायुग जैसा वैभव देखने को मिला। शुक्रवार दोपहर ठीक 12 बजे, जब भगवान राम का जन्म हुआ, तब सूर्य की किरणों ने उनके ललाट पर ‘सूर्य तिलक’ कर पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया। नए भव्य मंदिर में रामलला के विराजमान होने के बाद यह दूसरा अवसर है जब विज्ञान और अध्यात्म के अनूठे संगम से प्रभु का सूर्य अभिषेक हुआ।
9 मिनट का दिव्य अनुभव
दोपहर 12:00 बजे अभिजीत मुहूर्त शुरू होते ही मंदिर के शिखर पर लगे दर्पण और लेंस के जरिए सूर्य की किरणें सीधे गर्भगृह तक पहुँचीं। करीब 9 मिनट तक भगवान के ललाट पर सूर्य की किरणें नीले और सुनहरे रंग के तिलक के रूप में चमकती रहीं। इस अलौकिक दृश्य को देखकर मंदिर परिसर में मौजूद हजारों भक्त ‘जय श्री राम’ के नारों से झूम उठे।
पंचामृत अभिषेक और स्वर्ण जड़ित पीतांबर
सूर्याभिषेक से पूर्व, सुबह तड़के ही रामलला का विशेष पंचामृत अभिषेक किया गया। इस खास मौके पर प्रभु को स्वर्ण जड़ित पीतांबर (पीले वस्त्र) पहनाए गए थे। मंदिर को देसी और विदेशी फूलों से बेहद खूबसूरती के साथ सजाया गया था। राम जन्मभूमि परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच भक्तों का तांता लगा रहा।
पीएम मोदी ने देखा डिजिटल प्रसारण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस ऐतिहासिक क्षण को डिजिटल माध्यम से देखा। उन्होंने इस घटना को करोड़ों भारतीयों के लिए गौरव का क्षण बताया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि यह सूर्य तिलक विकसित भारत के संकल्पों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
“रामलला का यह सूर्य तिलक केवल एक वैज्ञानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतिबिंब है। आज अयोध्या की दिव्यता देखते ही बनती है।” > — चंपत राय, महासचिव, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट

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