न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक सार्वजनिक सुनवाई उस समय विवाद का केंद्र बन गई, जब इजरायल के राजदूत और बच्चों एवं सशस्त्र संघर्ष मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष प्रतिनिधि के बीच तीखी बहस छिड़ गई। बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और ऊंची आवाज में बहस देखने को मिली, जिससे कूटनीतिक मर्यादाओं पर सवाल खड़े हो गए।
जानकारी के अनुसार, सुनवाई के दौरान गाजा संघर्ष और बच्चों पर पड़ रहे उसके प्रभाव को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि ने संघर्ष क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की। उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इजरायल के राजदूत ने कड़ा विरोध जताया और संयुक्त राष्ट्र पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
बहस इतनी तीखी हो गई कि दोनों एक-दूसरे की बात काटने लगे। बैठक के दौरान “चुप हो जाइए” जैसे शब्द भी सुनाई दिए, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। उपस्थित प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन कुछ समय तक बहस जारी रही।
इजरायली राजदूत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों में इजरायल की सुरक्षा चुनौतियों और हमास जैसे संगठनों द्वारा किए गए हमलों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। वहीं, यूएन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उनका दायित्व केवल संघर्ष से प्रभावित बच्चों की स्थिति पर ध्यान केंद्रित करना है और रिपोर्ट तथ्यों के आधार पर तैयार की जाती हैं।
इस घटना ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर बढ़ते तनाव और मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भीतर मौजूद मतभेदों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि गाजा युद्ध और उससे जुड़े मानवीय मुद्दों पर वैश्विक स्तर पर गहरे मतभेद बने हुए हैं, जिसके कारण ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।

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