Krishna Ashtakshar Mantra : नई दिल्ली। सनातन धर्म में मंत्रों का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा-पाठ और ध्यान के दौरान मंत्रों का उच्चारण न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मकता भी बढ़ाता है। इन्हीं शक्तिशाली मंत्रों में एक है भगवान श्रीकृष्ण का मूल मंत्र, जिसे ‘कृष्ण अष्टाक्षर मंत्र’ के नाम से जाना जाता है।
यह मंत्र न सिर्फ मंदिरों में गूंजता है, बल्कि करोड़ों भक्तों के जीवन में एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
मंत्र:
“ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥”
मंत्र का सरल अर्थ
इस मंत्र का अर्थ है – “मैं भगवान कृष्ण को बार-बार प्रणाम करता/करती हूं, जो वासुदेव के पुत्र हैं, परमात्मा स्वरूप हैं और अपने भक्तों के सभी कष्टों को हर लेते हैं।”
एक मंत्र में कई रूपों का स्मरण
इस मंत्र में भगवान कृष्ण को कई नामों से पुकारा गया है—
- कृष्णाय : जो सबको अपनी ओर आकर्षित करते हैं
- वासुदेवाय : वासुदेव के पुत्र
- हरये : दुखों को हरने वाले
- परमात्मने : सर्वोच्च ईश्वर
- गोविंदाय : इंद्रियों और जीवों के रक्षक
जाप से मिलते हैं ये लाभ
- नियमित जाप से मानसिक तनाव और चिंता कम होती है
- व्यक्ति के भीतर विनम्रता और सकारात्मक सोच विकसित होती है
- जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है
- ध्यान और एकाग्रता में सुधार होता है
कब और कैसे करें जाप?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सुबह सूर्योदय के समय तुलसी या रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। इसके अलावा, जब भी मन अशांत हो या तनाव महसूस हो, तब भी इस मंत्र का स्मरण करने से तुरंत राहत मिल सकती है।
घर में बढ़ती है सकारात्मक ऊर्जा
अगर इस मंत्र को रोजाना पूजा, आरती या ध्यान के समय शामिल किया जाए, तो घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बना रहता है।
सनातन परंपरा में मंत्रों को आत्मिक शक्ति का स्रोत माना गया है। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण का यह मूल मंत्र न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में मानसिक शांति पाने का एक सरल और प्रभावी उपाय भी है।

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