नई दिल्ली: 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने डिजिटल इंडिया को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। UPI पेमेंट सिस्टम की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद अब यह मॉडल सरकार और पेमेंट एग्रीगेटर्स के लिए चिंता का विषय बन गया है।
देश में UPI ट्रांजेक्शंस ने रिकॉर्ड स्तर छू लिया है, लेकिन इसके बावजूद पेमेंट एग्रीगेटर्स लगातार नुकसान में हैं। मुफ्त में पेमेंट की सुविधा और बढ़ती ट्रांजेक्शन फीस सरकार के लिए चुनौती बन गई है। सवाल यह है कि क्या 2026 का बजट डिजिटल इंडिया की रफ्तार को बनाए रख पाएगा, या इसे रोकने वाली नीतियां लागू की जाएंगी।
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विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को एक ऐसा संतुलन बनाना होगा, जिससे डिजिटल लेन-देन की लोकप्रियता जारी रहे और पेमेंट कंपनियों को भी आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े। वित्त मंत्रालय ने अब तक इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक निर्मला ताई डिजिटल क्रांति को बढ़ावा देने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रही हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, इस बजट में फ्री पेमेंट मॉडल में बदलाव, UPI के इस्तेमाल पर नई फीस संरचना, या पेमेंट एग्रीगेटर्स को वित्तीय राहत जैसे प्रस्ताव पेश किए जा सकते हैं।
देशभर के कारोबारियों और डिजिटल पेमेंट उपयोगकर्ताओं की नजरें अब 1 फरवरी पर हैं, जब वित्त मंत्री अपनी रणनीति का खुलासा करेंगी।

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