- बड़ी घटना: पीढापाल क्षेत्र के 200 से अधिक ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से हिंदू धर्म में वापसी की।
- शुद्धिकरण: वैदिक मंत्रोच्चार और हिंदू रीति-रिवाज के साथ शुद्धिकरण प्रक्रिया पूरी कर सनातन धर्म अपनाया।
- खुलासा: ग्रामीणों का आरोप—मिशनरी उन्हें हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ भड़काती थी।
CG NEWS कांकेर — छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग अंतर्गत कांकेर जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जिले के पीढापाल क्षेत्र में एक भव्य ‘घर वापसी’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें 200 से अधिक ग्रामीणों ने ईसाई धर्म का त्याग कर अपने मूल सनातन धर्म में वापसी कर ली है। इस सामूहिक धर्मांतरण (वापसी) को क्षेत्र में हिंदू संगठनों की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
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वैदिक रीति-रिवाज से हुआ स्वागत
जानकारी के मुताबिक, घर वापसी करने वाले सभी ग्रामीण पीढापाल और आसपास के इलाकों के निवासी हैं। रविवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इन सभी परिवारों ने स्वेच्छा से सनातन धर्म स्वीकार करने की घोषणा की। हिंदू समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों और साधु-संतों की मौजूदगी में इन ग्रामीणों का शुद्धिकरण किया गया। विधि-विधान से पूजा-पाठ और हवन के बाद हिंदू समाज के लोगों ने तिलक लगाकर और पुष्प वर्षा कर इन सभी का परिवार में स्वागत किया।
आमाबेड़ा हिंसा के बाद बढ़ी ‘घर वापसी’ की रफ्तार
हाल ही में आमाबेड़ा में शव दफनाने के मुद्दे पर हुई हिंसा और तनाव के बाद से ही स्थानीय समाज और हिंदू संगठनों ने इस अभियान को तेज कर दिया है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ ही दिनों के भीतर क्षेत्र के लगभग 200 से ज्यादा लोग वापस अपने मूल धर्म में लौट चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि बड़ेतेवड़ा में हुई एक हालिया घटना के बाद, उस इलाके के चर्च प्रमुख (पास्टर) ने भी ईसाई धर्म छोड़कर सनातन धर्म अपना लिया है।
“हिंदुओं के खिलाफ भड़काती थी मिशनरी”
धर्म वापसी करने वाले ग्रामीणों ने मिशनरियों के काम करने के तरीके पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि धर्मांतरण के दौरान कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं होता, बल्कि केवल विश्वास के नाम पर धर्म बदलवाया जाता है।
“ईसाई मिशनरी के लोग हमें हमारे ही मूल धर्म और देवी-देवताओं के खिलाफ भड़काते थे। हमें सलाह दी जाती थी कि हम अपनी पारंपरिक पूजा पद्धति को छोड़ दें। अब हमें अहसास हुआ है कि हमारी जड़ें सनातन में ही हैं।”
— घर वापसी करने वाले एक ग्रामीण का बयान
क्षेत्र में बढ़ता प्रभाव
बस्तर के अंदरूनी इलाकों में धर्मांतरण और घर वापसी का मुद्दा अब राजनीतिक और सामाजिक रूप से बेहद संवेदनशील हो गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाने के लिए यह ‘घर वापसी’ जरूरी है। प्रशासनिक स्तर पर पुलिस और खुफिया विभाग भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य बनी रहे।

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