Religious Conversion Case : नागपुर। क्या किसी व्यक्ति के घर में ईसा मसीह की मूर्ति या क्रॉस मिलने का मतलब यह है कि उसने हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया है? इस सवाल पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि घर में किसी दूसरे धर्म के प्रतीक या तस्वीर होने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि व्यक्ति ने धर्म परिवर्तन कर लिया है।
अकोला के छात्र से जुड़ा था मामला
दरअसल यह मामला महाराष्ट्र के अकोला जिले के एक कॉलेज छात्र से जुड़ा है। छात्र ने अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था, जिसे अकोला की जाति जांच समिति ने खारिज कर दिया था।
समिति का तर्क था कि छात्र के घर में क्रॉस और ईसा मसीह की तस्वीरें मिली हैं। इसके साथ ही 1962 के एक स्कूल रिकॉर्ड का हवाला दिया गया, जिसमें उसके परिवार को ‘ईसाई’ बताया गया था। इसी आधार पर समिति ने निष्कर्ष निकाला कि परिवार ने ईसाई धर्म अपना लिया है, इसलिए छात्र SC स्टेटस का हकदार नहीं है।
छात्र ने कोर्ट में दी यह दलील
छात्र ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि उसके परिवार ने कभी भी औपचारिक रूप से धर्म परिवर्तन नहीं किया है। 1962 के स्कूल रिकॉर्ड को लेकर उसने बताया कि उस समय जातिगत भेदभाव से बचने के लिए उसके दादा ने स्कूल में खुद को ‘ईसाई’ दर्ज कराया था, लेकिन वास्तव में परिवार ने धर्म परिवर्तन नहीं किया था।
छात्र ने अपने पक्ष में कई सरकारी दस्तावेज और रिश्तेदारों के वैध SC प्रमाण पत्र भी अदालत के सामने पेश किए।
हाईकोर्ट ने समिति के आदेश को किया रद्द
न्यायमूर्ति मुकुलिका जावलकर और न्यायमूर्ति नंदेश देशपांडे की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए जाति जांच समिति के तर्कों को ‘निराधार और त्रुटिपूर्ण’ बताया। अदालत ने समिति के आदेश को रद्द कर प्रशासन को तुरंत छात्र को SC प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया।
फैसले के अहम मायने
इस फैसले के कई महत्वपूर्ण कानूनी और सामाजिक पहलू सामने आए हैं:
-
ठोस सबूत जरूरी: अदालत ने कहा कि धर्म परिवर्तन साबित करने के लिए बपतिस्मा जैसे धार्मिक अनुष्ठान या उसके आधिकारिक दस्तावेज जरूरी होते हैं।
-
संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा: केवल संदेह या पुराने रिकॉर्ड के आधार पर किसी व्यक्ति से उसके जातिगत अधिकार नहीं छीने जा सकते।
-
निजी आस्था की स्वतंत्रता: भारत में हर व्यक्ति को अपने घर में किसी भी धर्म के प्रतीक रखने की स्वतंत्रता है, इसे धर्म परिवर्तन का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

More Stories
Meta Apologizes PM Modi Facebook Video Removed by Mistake : IT मंत्रालय ने मांगा जवाब, Meta ने कहा- गलती से हटा था पीएम मोदी का वीडियो
CJP प्रदर्शन पर Supreme Court’ का बड़ा फैसला’ 18 साल से कम उम्र के छात्रों को तुरंत रिहा करने का आदेश, डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश
CJP Dharmendra Pradhan Resignation Proposal : मंत्रालय बदलने के प्रस्ताव को CJP ने किया खारिज, इस्तीफे की मांग दोहराई