तारीख और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 10 मार्च 2026 की शाम से शुरू होकर 11 मार्च 2026 तक रहेगी। उदयातिथि की गणना के आधार पर शीतला अष्टमी का व्रत और पूजन बुधवार, 11 मार्च 2026 को किया जाएगा। साधक ब्रह्म मुहूर्त में उठकर ठंडे जल से स्नान करने के बाद माता की अर्चना करेंगे।
बासोड़ा में क्यों नहीं जलता चूल्हा?
इस त्योहार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। भोजन एक दिन पहले यानी सप्तमी की रात को ही तैयार कर लिया जाता है। अगले दिन माता को इसी ‘बासी भोजन’ का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि माता शीतला शीतलता की देवी हैं और अग्नि या ताजी बनी गर्म चीजें उन्हें अप्रिय हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो यह समय ऋतु परिवर्तन का होता है। सर्दियों की विदाई और गर्मियों की शुरुआत के इस संधि काल में बासी भोजन शरीर को बदलते तापमान के अनुकूल ढालने में मदद करता है।
“माता शीतला स्वच्छता और आरोग्य की देवी हैं। उनके हाथ में झाड़ू और कलश यह संदेश देते हैं कि सफाई ही बीमारियों से बचने का एकमात्र उपाय है। बासोड़ा का व्रत बच्चों के स्वास्थ्य के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।”
— आचार्य राजेश पाठक, ज्योतिषाचार्य
बासोड़ा पूजन के लिए सप्तमी की रात को ही मीठा भात, राबड़ी, चने की दाल और पूरी जैसे पकवान तैयार कर लिए जाते हैं। अष्टमी के दिन सुबह मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। प्रशासन ने प्रमुख शीतला माता मंदिरों के आसपास भीड़ नियंत्रण और सफाई के कड़े निर्देश दिए हैं। दिल्ली के गुड़गांव स्थित प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर में विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

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