नई दिल्ली। Iran में जारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। ईरानी अधिकारियों ने पहली बार स्वीकार किया है कि इन प्रदर्शनों के दौरान अब तक सुरक्षाकर्मियों समेत लगभग 2 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। यह जानकारी रॉयटर्स से बातचीत में एक ईरानी अधिकारी ने दी है।
अधिकारी ने कहा कि जिन लोगों को सरकार “आतंकवादी” बता रही है, वही प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों—दोनों की मौत के पीछे जिम्मेदार हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि मरने वालों में कितने आम नागरिक, प्रदर्शनकारी या सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।
खराब आर्थिक हालात से भड़की अशांति
ईरान में यह विरोध प्रदर्शन खराब आर्थिक स्थिति, महंगाई और बेरोजगारी के चलते शुरू हुए थे। बीते तीन वर्षों में यह अशांति ईरानी सरकार के लिए सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती मानी जा रही है। हालात ऐसे समय में बिगड़े हैं, जब पिछले वर्ष इजरायल और अमेरिका के साथ तनाव और हमलों के बाद सरकार पर दबाव पहले से ही बढ़ा हुआ है।
प्रदर्शनों पर सरकार का दोहरा रुख
1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से सत्ता में मौजूद धार्मिक नेतृत्व ने प्रदर्शनों को लेकर दोहरा रुख अपनाया है। एक ओर आर्थिक समस्याओं को लेकर लोगों की नाराजगी को जायज बताया गया है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा बलों के जरिए कड़ी कार्रवाई भी की गई है।
अमेरिका और इजरायल पर आरोप
ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका और इजरायल पर देश में अशांति फैलाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कुछ अज्ञात तत्वों ने, जिन्हें सरकार आतंकवादी मानती है, विरोध प्रदर्शनों को हिंसक रूप दे दिया है।
संचार प्रतिबंधों से जानकारी सीमित
एक मानवाधिकार संगठन पहले ही सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों की गिरफ्तारी का दावा कर चुका है। हाल के दिनों में इंटरनेट बंद होने और संचार प्रतिबंधों के कारण ईरान से सही और पूरी जानकारी सामने आने में दिक्कतें आ रही हैं।

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