Makar Sankranti 2026 नई दिल्ली। मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का पावन पर्व है। इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व माना गया है। शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन विधिपूर्वक स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन से दुर्भाग्य दूर होकर सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यदि इस दिन स्नान के जल में काला तिल मिलाया जाए तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
क्यों खास है काले तिल से स्नान?
ज्योतिष और पुराणों में काले तिल को शनि ग्रह से जुड़ा बताया गया है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जो शनि की राशि मानी जाती है। इस सूर्य-शनि संयोग में काले तिल का प्रयोग करने से शनि की नकारात्मक ऊर्जा शांत होती है और सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इससे शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या, गरीबी और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
मकर संक्रांति स्नान का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। काले तिल के साथ स्नान करने से दुर्भाग्य, कर्ज, रोग और मानसिक तनाव में कमी आती है। यह स्नान धन, स्वास्थ्य और सौभाग्य प्रदान करता है।
काले तिल से स्नान की विधि
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एक बाल्टी या लोटे में साफ पानी लें।
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उसमें मुट्ठी भर काला तिल डालें।
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चाहें तो थोड़ा सा गुड़ या शहद भी मिला सकते हैं।
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सूर्य की ओर मुख करके ‘ॐ सूर्याय नमः’ और ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 11 बार जाप करें।
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स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दें।
ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय स्नान करना सबसे उत्तम माना गया है।
काले तिल से स्नान के लाभ
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शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है।
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गरीबी, कर्ज और दुर्भाग्य से मुक्ति मिलती है।
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मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है।
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स्वास्थ्य में सुधार होता है।
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धन-धान्य और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।
ध्यान रखने योग्य बातें
स्नान के बाद साफ या नए वस्त्र पहनें, तिल-गुड़ का दान करें और सूर्य को अर्घ्य देते समय ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें। संभव हो तो हनुमान चालीसा या सूर्य चालीसा का पाठ भी करें।

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