कैसे बन रहा है 4 एकादशी का दुर्लभ संयोग?
हिंदू पंचांग में लगभग हर तीन साल बाद अधिक मास आता है। जब सूर्य संक्रांति के बिना एक चंद्र मास पूरा हो जाता है, तब अतिरिक्त माह जुड़ता है। इस बार ज्येष्ठ माह दो बार पड़ने से श्रद्धालुओं को चार एकादशी व्रत रखने का अवसर मिलेगा। मंदिरों में इसकी तैयारी अभी से शुरू हो गई है। सुबह की आरती में घंटियों की आवाज और कपूर की खुशबू के बीच भक्तों में अलग उत्साह दिख रहा है। धर्माचार्यों के मुताबिक अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस दौरान व्रत, जप और दान का विशेष महत्व माना जाता है। कई श्रद्धालु पूरे महीने सात्विक नियमों का पालन करते हैं।
यह रहें एकादशी व्रत की संभावित तिथियां
- अपरा एकादशी: 13 मई 2026
- निर्जला एकादशी: 28 मई 2026
- योगिनी एकादशी: 11 जून 2026
- देवशयनी एकादशी: 26 जून 2026
पंचांग गणना के अनुसार व्रत की तिथियों में क्षेत्रीय अंतर संभव है। श्रद्धालुओं को स्थानीय पंचांग या मंदिर समिति से पुष्टि करने की सलाह दी गई है।
अधिक मास में क्यों बढ़ जाता है पूजा का महत्व?
मान्यता है कि अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों का फल लंबे समय तक शुभ प्रभाव देता है। कई लोग इस महीने गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम और भागवत कथा का आयोजन करते हैं। शाम के समय मंदिरों में दीपों की कतारें अलग ही दृश्य बनाती हैं। छोटे बच्चे फूल सजाते दिखते हैं, जबकि बुजुर्ग भक्त भजन गाते नजर आते हैं।

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