- बड़ा उछाल: मध्य पूर्व में छिड़े युद्ध ने कच्चे तेल की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचाया।
- भारतीय बाजार: वैश्विक तेजी के बावजूद भारत में फिलहाल कीमतें स्थिर, आम जनता को आंशिक राहत।
- आगे की चुनौती: आपूर्ति बाधित हुई तो घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की दरें नई ऊंचाई छू सकती हैं।
Iran Israel War Oil Prices , नई दिल्ली — ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने ग्लोबल ऑयल मार्केट को हिलाकर रख दिया है। कच्चे तेल की कीमतें देखते ही देखते 72% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। दुनिया भर में तेल की सप्लाई चेन पर खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, भारतीय तेल कंपनियों ने अभी तक स्थानीय स्तर पर कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव किसी भी वक्त खेल बिगाड़ सकता है।
मार्केट का गणित: क्यों लगी तेल में आग?
वैश्विक तेल बाजार में यह उथल-पुथल सीधे तौर पर मध्य पूर्व के तनाव से जुड़ी है। ईरान तेल उत्पादन का बड़ा केंद्र है। इजराइल के साथ जारी संघर्ष ने निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया है। सप्लाई रुकने की आशंका में कच्चे तेल की मांग आसमान छू रही है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगी यह आग सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था को झुलसा सकती है।
“वैश्विक तनाव ने तेल बाजार को अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है। अगर संघर्ष लंबा खिंचा, तो भारत में भी तेल की कीमतों को स्थिर रखना मुश्किल होगा।” — ग्लोबल ऑयल एनालिस्ट
कच्चे तेल में भारी तेजी के बावजूद, आज सुबह भारत के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की दरें पुराने स्तर पर ही टिकी रहीं। आप अपनी जरूरत के अनुसार आज की दरें चेक कर सकते हैं:
- दिल्ली: पेट्रोल ₹94.72 | डीजल ₹87.62
- मुंबई: पेट्रोल ₹104.21 | डीजल ₹92.15
- चेन्नई: पेट्रोल ₹100.75 | डीजल ₹92.34
- कोलकाता: पेट्रोल ₹103.94 | डीजल ₹90.76
भारतीय तेल विपणन कंपनियां (HPCL, BPCL, IOCL) फिलहाल घाटे को खुद सह रही हैं। लेकिन यह स्थिति ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकती

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