Income Tax India : नई दिल्ली/गंगटोक भारत में जहां एक तरफ नौकरीपेशा और कारोबारी वर्ग बजट के समय इनकम टैक्स स्लैब पर नजरें गड़ाए रहता है, वहीं देश का एक हिस्सा ऐसा भी है जिसे इनकम टैक्स की कोई फिक्र नहीं होती। पूर्वोत्तर का बेहद खूबसूरत राज्य सिक्किम भारत का वह एकमात्र राज्य है, जहां के मूल निवासियों को एक रुपये का भी आयकर नहीं देना पड़ता। यह विशेष छूट पिछले 51 सालों से लगातार जारी है।
विलय के समय हुई थी खास ‘डील’
सिक्किम का भारत में विलय 1975 में हुआ था। इससे पहले सिक्किम एक स्वतंत्र साम्राज्य था, जहां ‘चोग्याल’ वंश का शासन चलता था। जब सिक्किम को भारत का 22वां राज्य बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई, तब एक ऐतिहासिक समझौता हुआ था।
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अनुच्छेद 371F: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371F के तहत सिक्किम को विशेष दर्जा दिया गया।
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शर्त: इस समझौते के तहत यह तय हुआ कि सिक्किम के पुराने कानूनों और सामाजिक-धार्मिक व्यवस्था को संरक्षित रखा जाएगा। इसमें टैक्स से जुड़ी छूट भी शामिल थी।
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(26AAA) का कमाल
सिक्किम के लोग आयकर क्यों नहीं भरते, इसका कानूनी आधार Income Tax Act, 1961 की धारा 10(26AAA) में छिपा है। इसके तहत सिक्किम के मूल निवासियों को राज्य के भीतर से होने वाली किसी भी आय या लाभांश (Dividend) और ब्याज पर पूरी तरह छूट मिलती है।
“सिक्किम के नागरिकों के लिए यह केवल एक वित्तीय लाभ नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और विलय के समय किए गए वादों के सम्मान का प्रतीक है।”
क्या सभी को मिलती है यह छूट?
शुरुआत में यह छूट केवल उन लोगों तक सीमित थी जिनके नाम 1961 के ‘सिक्किम सब्जेक्ट रेगुलेशन’ में दर्ज थे। लेकिन 2023 में सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद इस दायरे को बढ़ा दिया गया। अब सिक्किम में रहने वाले उन सभी भारतीय मूल के लोगों को भी इस छूट का लाभ मिलता है, जो विलय के समय वहां बसे हुए थे।

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