Hypersonic’ नई दिल्ली। आधुनिक युद्धों की बदलती रणनीति को देखते हुए भारत अपनी सैन्य शक्ति में क्रांतिकारी विस्तार करने जा रहा है। DRDO प्रमुख समीर वी. कामत ने ‘ANI नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0’ (30 अप्रैल 2026) में पुष्टि की है कि भारत Hypersonic’ मिसाइल तकनीक के बेहद करीब है। उन्होंने बताया कि भारत एक साथ दो घातक प्रणालियों पर काम कर रहा है, जिनमें से ‘हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल’ का परीक्षण बहुत जल्द (Fairly Soon) होने वाला है।
दो घातक तकनीक: क्यों इन्हें रोकना नामुमकिन है?
हाइपरसोनिक मिसाइलें न केवल तेज होती हैं, बल्कि हवा में अपना रास्ता बदलने में भी सक्षम होती हैं। DRDO प्रमुख के अनुसार:
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हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (HGV): यह तकनीक सबसे पहले सामने आएगी। यह रॉकेट बूस्टर की मदद से ऊंचाई पर जाती है और फिर बिना इंजन के Mach 10 तक की गति से लक्ष्य की ओर ‘ग्लाइड’ करती है। यह वर्तमान में सबसे एडवांस स्टेज पर है।
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हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (HCM): यह स्कैमजेट इंजन (Scramjet Engine) से लैस होती है और पूरी उड़ान के दौरान अपनी रफ्तार बनाए रखती है। जनवरी 2026 में भारत ने इसके इंजन का 12 मिनट का सफल ग्राउंड टेस्ट कर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई थी।
ब्रह्मोस बनाम हाइपरसोनिक
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रफ्तार का अंतर: वर्तमान में भारत की सबसे घातक ब्रह्मोस मिसाइल ‘सुपरसोनिक’ है (गति लगभग Mach 2.8), जबकि नई हाइपरसोनिक मिसाइलें Mach 5 (6,100 किमी/घंटा) से लेकर Mach 10 तक की गति हासिल कर सकती हैं।
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डिफेंस सिस्टम फेल: इतनी अधिक गति और कम ऊंचाई पर उड़ने के कारण दुनिया का कोई भी रडार या मिसाइल डिफेंस सिस्टम (जैसे S-400 या पैट्रियट) इन्हें समय रहते ट्रैक या इंटरसेप्ट नहीं कर पाएगा।

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