रायपुर: राजधानी रायपुर के अमलीडीह (जोन 10) स्थित पुष्पांजलि कॉलोनी में आवासीय भूमि पर हो रहे अवैध व्यावसायिक निर्माण के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और हास्यास्पद पहलू सामने आया है। एक तरफ जहां स्थानीय रहवासी और समाजसेवी अवैध निर्माण और असामाजिक तत्वों के जमावड़े से त्रस्त हैं, वहीं नगर निगम प्रशासन की ‘लाचारी’ ने पूरी व्यवस्था पर ही सवालिया निशान लगा दिया है।
🔴 विशेष रिपोर्ट: क्या ‘हवा’ में हो रहा है अवैध निर्माण? मालिक ढूंढने में निगम नाकाम!
इस गंभीर मुद्दे पर जब हमारे न्यूज़ पोर्टल ने संबंधित अधिकारी (अधीक्षण अभियंता) श्री अजय श्रीवास्तव से दूरभाष पर संपर्क किया, तो उनका जवाब बेहद निराशाजनक और चिंताजनक था।
अधिकारी का बयान: “अवैध निर्माण के खिलाफ पूरा निगम प्रशासन सख़्त है। कार्रवाई के लिए मौके पर दस्ते को भेजा गया था, लेकिन संपत्ति का कोई वैध मालिक या प्रतिनिधि वहां नहीं मिला, जिसके कारण कार्रवाई से बैरंग लौटना पड़ा।”
सबसे बड़ा सवाल : अधिकारी का यह बयान अपने आप में एक बहुत बड़ी विडंबना है। शहर के बीचों-बीच, एक आवासीय कॉलोनी में ईंट-गारे से इमारत खड़ी की जा रही है, व्यावसायिक दुकानें निकाली जा रही हैं, लेकिन करोड़ों का बजट और पूरा प्रशासनिक अमला रखने वाला नगर निगम उस अवैध कृत्य को अंजाम देने वाले व्यक्ति को ‘ढूंढ’ नहीं पा रहा है! क्या निगम के पास संपत्ति कर (Property Tax) और भू-स्वामियों का कोई रिकॉर्ड नहीं है? बिना मालिक के निर्माण कैसे हो रहा है? यह सीधे तौर पर प्रशासनिक अक्षमता या फिर भ्रष्ट गठजोड़ (मिलीभगत) की ओर इशारा करता है। दस्ते का बिना कार्रवाई के लौट आना, अपराधियों के हौसले बुलंद करने जैसा है।
रहवासियों की पीड़ा: 14 दिन से सिर्फ ‘खानापूर्ति’
छत्तीसगढ़ लोक सूचना अधिकार कार्यकर्ता संघ के प्रदेश सचिव व समाजसेवी अजय त्रिपाठी ने जोन 10 के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि 1 अप्रैल 2026 को जोन कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन 14 दिन बीतने के बाद भी अधीक्षण अभियंता द्वारा केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है।
कॉलोनी का माहौल हो रहा बर्बाद: पुष्पांजलि कॉलोनी के निवासी संजय शर्मा ने बताया कि यह खेल पिछले तीन-चार सालों से चल रहा है:
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वसूली का सिंडिकेट: आरोप है कि जोन 10 के अधिकारियों द्वारा अवैध नव-निर्माण कार्य पर सिर्फ ‘वसूली’ कर उसे अघोषित मान्यता दे दी जाती है।
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असुरक्षित माहौल: बिना कमर्शियल परमिशन के दुकानें खुलने से बीच सड़क पर बेतरतीब वाहन खड़े रहते हैं। असामाजिक तत्वों के जमावड़े के कारण महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना मुहाल हो गया है।
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पुलिस को भी दी गई है सूचना: लगातार बाधित हो रहे आवागमन और अशांति की शिकायत पूर्व में रायपुर पुलिस कमिश्नर से भी की जा चुकी है, लेकिन समाधान शून्य है।
चेतावनी: अब होगा उग्र आंदोलन
अवैध निर्माणकर्ता को ढूंढने में निगम की “तथाकथित नाकामी” से स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। अजय त्रिपाठी और रहवासियों ने निगम आयुक्त से मांग की है कि जोन 10 के इस भ्रष्ट तंत्र की उच्च स्तरीय जांच हो।
एक्टिविस्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मालिक को ढूंढकर अवैध निर्माण पर बुलडोजर नहीं चला और भ्रष्ट अधिकारियों को सेवामुक्त नहीं किया गया, तो निगम मुख्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ने की संपूर्ण जिम्मेदारी रायपुर नगर निगम प्रशासन और जोन 10 कमिश्नर की होगी।


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