नई दिल्ली | 25 मार्च, 2026 चैत्र नवरात्र का पर्व अपने सातवें और अत्यंत प्रभावशाली पड़ाव पर पहुँच गया है। आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है, जो शक्ति के सबसे निर्भीक और शक्तिशाली स्वरूप ‘मां कालरात्रि’ को समर्पित है। मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त आज के दिन पूरी श्रद्धा से मां की उपासना करते हैं, उनके जीवन से अकाल मृत्यु का भय, रोग और समस्त नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं।
कैसा है मां का स्वरूप?
मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन वे सदैव शुभ फल देने वाली हैं, इसलिए उन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है।
-
रंग: गहरा काला (अंधकार के समान)
-
वाहन: गधा (गर्धब)
-
शस्त्र: उनके चार हाथ हैं, जिनमें से एक में खड्ग और दूसरे में लोहे का अस्त्र है, जबकि दो हाथ अभय और वरद मुद्रा में हैं।
-
अलंकार: गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला।
पूजा विधि और विशेष भोग
सप्तमी की पूजा आधी रात (निशा पूजा) में करने का भी विधान है। ज्योतिषियों के अनुसार:
-
लाल पुष्प: मां को लाल रंग के फूल, विशेषकर चमेली या गुड़हल अर्पित करें।
-
गुड़ का नैवेद्य: मां कालरात्रि को गुड़ का भोग अति प्रिय है। आज के दिन गुड़ का दान करने से आर्थिक संकट दूर होते हैं।
-
नीला रंग: आज के दिन नीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
संकट टालने वाली मां कालरात्रि की आरती
कालरात्रि जय-जय महाकाली। काल के मुख से बचाने वाली॥ दुष्ट संहारिणी नाम तुम्हारा। महा चंडी तेरा अवतारा॥ पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली तेरा पसारा॥ खड्ग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली॥ कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूं तेरा नजारा॥

More Stories
Chhattisgarh Job Fair : 6 मई को जॉब फेयर , लाइवलीहुड कॉलेज सकरी में सजेगा रोजगार का बाजार
May 1, 2026 new rules : 1 मई से बदले नियम: बैंकिंग, LPG, रेलवे और डिजिटल पेमेंट पर असर, आम आदमी की जेब पर पड़ेगा सीधा प्रभाव
Chhattisgarh Breaking News : राजधानी में सनसनी , मासूम से दुष्कर्म की खबर फैलते ही मोहल्लेवासियों का फूटा गुस्सा, थाने का घेराव