रिकॉर्ड वोटिंग या बदला हुआ बेस?
उच्च मतदान को लोकतंत्र की मजबूती कहा जा रहा है। लंबी कतारें थीं। बूथ के बाहर सुबह से भीड़। आप महसूस कर सकते थे—लोग वोट डालने को उतावले थे लेकिन इसी बीच एक और आंकड़ा सामने आया—90.8 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का दावा। यहीं से गणित बदलता है। अगर वोटर बेस छोटा हो गया, तो प्रतिशत अपने आप ऊपर जाता है। यानी कम मतदाता, ज्यादा प्रतिशत। यही बहस अब तेज हो रही है।
आंकड़ों का खेल कैसे काम करता है?
मान लीजिए पहले 100 लोग थे और 80 ने वोट दिया—तो 80%। अब अगर लिस्ट से 20 नाम हट जाएं और 80 में से 74 वोट करें—तो प्रतिशत सीधे 92.5% के पास पहुंच जाता है। यानी सवाल सिर्फ वोटिंग का नहीं—कितने लोग वोट देने के हकदार थे, यह भी उतना ही अहम है।
जमीनी तस्वीर: लाइनें लंबी, सवाल और लंबे
कई इलाकों में वोटर्स ने शिकायत भी की कि उनका नाम लिस्ट में नहीं मिला। वहीं, कुछ बूथों पर रिकॉर्ड टर्नआउट देखा गया। एक मतदाता ने कहा, “हम हर चुनाव में वोट देते हैं, इस बार नाम ही नहीं मिला।” यह एक लाइन बहुत कुछ कह जाती है।

More Stories
Indian shooter Jaspal Rana Passes Away : भारतीय निशानेबाजी जगत को बड़ा झटका’ दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा का निधन
BREAKING NEWS : दिल्ली के तुगलकाबाद में भीषण आग’ तीन की मौत, छह झुलसे; छत के रास्ते किया गया रेस्क्यू
Diesel’ बिक्री पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला’ एक ग्राहक को 200 लीटर से ज्यादा नहीं मिलेगा ईंधन