परमाणु शर्तों पर अड़ा अमेरिका, ईरान ने दिखाया कड़ा रुख
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बीच शनिवार रात तक चली लंबी बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सकी। अमेरिका ने शर्त रखी थी कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करना होगा और भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न करने की लिखित गारंटी देनी होगी। जवाब में, ईरानी सेना के केंद्रीय कमान (खतम अल-अंबिया) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम ज़ुल्फिकारी ने रविवार को तेहरान में कहा, “अमेरिका के साथ हमारी बातचीत विफल रही है क्योंकि उनकी मांगें अतार्किक और अनुचित थीं।”
ज़ुल्फिकारी ने आगे कहा कि अमेरिका ने शांति के नाम पर सरेंडर की शर्तें रखी थीं, जिसे ईरान कभी स्वीकार नहीं करेगा। “हम अपनी किसी भी शर्त पर कोई समझौता नहीं करेंगे। युद्ध के मैदान में फैसले होते हैं, मेज पर धमकियों से नहीं,” प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा। ईरान का आरोप है कि अमेरिका और इज़रायल ने लेबनान में हमले जारी रखकर पहले ही सीजफायर का उल्लंघन किया है।
“अमेरिकी पक्ष की अनुचित और अत्यधिक मांगों ने बातचीत की प्रगति को रोक दिया। हम दबाव में आकर कोई समझौता नहीं करेंगे।” — इब्राहिम ज़ुल्फिकारी, प्रवक्ता, IRGC/खतम अल-अंबिया
शांति वार्ता विफल होने का सीधा असर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पड़ सकता है, जहाँ ईरान ने पहले ही नाकेबंदी की हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी है कि ईरान के पास अब कोई ‘कार्ड’ नहीं बचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वार्ता टूटने के बाद खाड़ी क्षेत्र में सैन्य टकराव एक बार फिर चरम पर पहुँच सकता है। पाकिस्तान ने इस असफलता को ‘दुखद’ बताया है, क्योंकि उसे उम्मीद थी कि 12 अप्रैल तक किसी ठोस समझौते पर मुहर लग जाएगी।

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