निचली अदालत के आदेश पर दर्ज हुआ था मुकदमा
यह पूरा विवाद तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद शुरू हुआ। आशुतोष ने पूर्व में जिला अदालत में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(4) के तहत प्रार्थना पत्र दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज कर विवेचना का निर्देश दिया था। इसी न्यायिक आदेश के बाद झूंसी पुलिस ने जांच शुरू की है।
कानूनी दांवपेच और याचिका का आधार
अग्रिम जमानत याचिका के जरिए बचाव पक्ष का तर्क है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं। अधिवक्ताओं के माध्यम से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने हाईकोर्ट से राहत की मांग की है ताकि विवेचना के दौरान उन्हें पुलिस हिरासत में न लिया जाए। प्रयागराज के कानूनी हलकों में इस हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर सरगर्मी तेज है। हाईकोर्ट की बेंच अब यह तय करेगी कि क्या स्वामी को गिरफ्तारी से सुरक्षा दी जाए या पुलिस को अपनी जांच जारी रखने की छूट मिले।
अदालती आदेश का मुख्य अंश
“न्यायालय ने मामले की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए झूंसी थाने की पुलिस को निर्देश दिया था कि वह संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना सुनिश्चित करे।”
— विशेष पॉक्सो कोर्ट के आदेश का संदर्भ
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद अब सरकारी वकील को इस पर जवाब तैयार करने के लिए समय दिया जा सकता है। झूंसी पुलिस फिलहाल मामले में साक्ष्य जुटा रही है। प्रयागराज पुलिस की टीम आशुतोष ब्रह्मचारी के बयानों और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। यदि हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होती है, तो पुलिस स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पूछताछ के लिए हिरासत में ले सकती है। स्थानीय प्रशासन ने झूंसी और आसपास के क्षेत्रों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

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