Supreme Court , नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की सुरक्षा को लेकर उठ रही शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रवैया अपनाया है। सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर पूछा है कि बीएलओ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे क्या व्यवस्थाएं बनाई जाएंगी।
यह नोटिस उस याचिका पर जारी किया गया है जिसमें आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बीएलओ को धमकियों, हमलों और राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि बीएलओ को फील्ड में काम करते समय पर्याप्त सुरक्षा, मोबाइल निगरानी और सुरक्षित रिपोर्टिंग व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि मतदाता सूची का सत्यापन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है और बीएलओ को किसी भी प्रकार के जोखिम में डालना उचित नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की कि “यदि बीएलओ सुरक्षित नहीं होंगे तो स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदाता सूची तैयार करना मुश्किल हो जाएगा।” न्यायालय ने राज्य सरकार से यह भी पूछा कि पिछले कुछ महीनों में बीएलओ के साथ हुई घटनाओं पर क्या कार्रवाई की गई है और क्या दोषियों को चिन्हित कर कार्रवाई की गई है।
राज्य में बढ़ा कार्यभार, दबाव भी भारी
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के लिए हज़ारों बीएलओ को घर-घर जाकर सत्यापन कार्य सौंपा गया है। शिकायतों के अनुसार कई क्षेत्रों में बीएलओ को राजनीतिक समूहों की ओर से दबाव बनाने, धमकाने और प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयासों का सामना करना पड़ा है। बीएलओ संगठनों ने दावा किया है कि सुरक्षा की कमी के चलते कई अधिकारी ड्यूटी पर जाने से डर रहे हैं। वहीं, ऊपर से बढ़ते लक्ष्य और सख्त समयसीमा के कारण काम का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।

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