Shani Jayanti’ नई दिल्ली, 14 मई। ज्येष्ठ माह की अमावस्या इस बार बेहद खास मानी जा रही है। 16 मई को शनि जयंती और वट सावित्री व्रत का दुर्लभ महासंयोग बन रहा है, जो कई वर्षों बाद देखने को मिल रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया दान-पुण्य कई गुना फलदायी होता है।
शनि जयंती का महत्व
शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही शनि देव का जन्म हुआ था। इस दिन विधि-विधान से पूजा और दान करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य दोषों से राहत मिलती है।
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वट सावित्री व्रत का संयोग
इसी दिन सुहागिन महिलाएं वट सावित्री व्रत रखकर पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वट (बरगद) वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
राशि अनुसार करें ये 1 दान
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि व्यक्ति अपनी राशि के अनुसार दान करता है तो उसे विशेष लाभ मिलता है—
- मेष : गुड़ या लाल वस्त्र का दान
- वृषभ : चावल या सफेद वस्त्र
- मिथुन : हरी मूंग या हरे कपड़े
- कर्क : दूध या चांदी का दान
- सिंह : गेहूं या तांबे की वस्तु
- कन्या : साबुत मूंग या हरी सब्जियां
- तुला : सुगंधित वस्त्र या इत्र
- वृश्चिक : मसूर दाल या लाल फल
- धनु : हल्दी या पीले वस्त्र
- मकर : तिल, तेल या काला कपड़ा
- कुंभ : काला तिल या लोहे की वस्तु
- मीन : केला या पीले फल
दान का विशेष महत्व
मान्यता है कि शनि जयंती के दिन गरीबों, जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को दान करने से शनि दोष शांत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

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