क्यों खास माना जाता है मलमास?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मलमास को “पुरुषोत्तम मास” भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस माह में किया गया मंत्र जप और दान कई गुना अधिक फल देता है। सुबह के शांत वातावरण में मंदिरों की घंटियां और मंत्रों की ध्वनि अलग ही आध्यात्मिक माहौल बना देती है। कई श्रद्धालु इस पूरे महीने व्रत और नियम का पालन भी करते हैं। पंडितों के अनुसार जिन लोगों को पितृ दोष, मानसिक तनाव या बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, वे इस दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जप कर सकते हैं। खासतौर पर ये मंत्र अधिक बोले जाते हैं:
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- ॐ विष्णवे नमः
- श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ
भक्ति के साथ अनुशासन भी जरूरी
धर्माचार्यों का कहना है कि केवल मंत्र जप ही नहीं, बल्कि व्यवहार और दिनचर्या में संयम भी जरूरी है। कई लोग सूर्योदय से पहले स्नान कर तुलसी के पास दीप जलाते हैं। आप मंदिरों में जाएं तो वहां अलग ही शांति महसूस होती है। धूप की खुशबू, शंख की आवाज और धीमे स्वर में चल रहा मंत्रोच्चार माहौल को भक्तिमय बना देता है। धार्मिक विशेषज्ञ बताते हैं कि इस दौरान जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करना भी शुभ माना जाता है।

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