दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्रालय सिगरेट, गुटखा और तंबाकू उत्पादों पर लगने वाले टैक्स को लेकर एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। फिलहाल, इन उत्पादों पर 28% जीएसटी (GST) लगता है, लेकिन सरकार अब इस पर 40% जीएसटी के अलावा एक अतिरिक्त टैक्स लगाने पर विचार कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य इन हानिकारक उत्पादों के सेवन को हतोत्साहित करना और इनसे होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए राजस्व जुटाना है।
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क्या है सरकार की योजना?
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, एक नए सार्वजनिक स्वास्थ्य कर (Public Health Tax) पर विचार किया जा रहा है। इस टैक्स को सिगरेट, सिगार, बीड़ी, गुटखा, पान मसाला और तंबाकू के अन्य उत्पादों पर लगाया जाएगा। यह टैक्स 40% जीएसटी से अलग होगा।
- पहला चरण: सरकार पहले इन उत्पादों पर 40% जीएसटी लगाएगी, जो वर्तमान 28% से काफी अधिक है।
- दूसरा चरण: इसके बाद, इस 40% जीएसटी के ऊपर एक अतिरिक्त पब्लिक हेल्थ टैक्स लगाया जाएगा, जिसकी दर अभी तय नहीं हुई है।
क्यो लगाया जा रहा है यह टैक्स?
- स्वास्थ्य जागरूकता: इस अतिरिक्त टैक्स का मुख्य उद्देश्य इन उत्पादों को इतना महंगा बनाना है कि आम लोग, खासकर युवा, इनका सेवन कम कर दें।
- राजस्व जुटाना: इन उत्पादों के सेवन से होने वाली बीमारियों, जैसे कैंसर, हृदय रोग और फेफड़ों की समस्याओं के इलाज पर सरकार को भारी खर्च करना पड़ता है। यह अतिरिक्त टैक्स इसी खर्च को पूरा करने में मदद करेगा।
- डब्ल्यूएचओ की सिफारिशें: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी तंबाकू उत्पादों पर अधिक टैक्स लगाने की सिफारिश करता रहा है ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सके।
उद्योग पर क्या होगा असर?
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो तंबाकू उद्योग पर इसका बड़ा असर पड़ेगा। सिगरेट और गुटखा कंपनियों के शेयर गिर सकते हैं और उनकी बिक्री में भी कमी आ सकती है। हालांकि, सरकार का मानना है कि यह कदम जनहित में है और इससे दीर्घकाल में देश को आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह से फायदा होगा।
यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इस पर अंतिम फैसला जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिया जाएगा।

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