हंगामे की जड़: राहुल गांधी और पूर्व सेना प्रमुख की किताब का मुद्दा
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा के अंशों का हवाला देते हुए चीन सीमा विवाद पर सरकार को घेरने की कोशिश की। स्पीकर ओम बिरला ने नियम 349 का हवाला देते हुए उन्हें अप्रकाशित सामग्री पढ़ने से रोक दिया। इसके विरोध में विपक्षी सांसद सदन के बीचों-बीच (वेल) में आ गए और नारेबाजी करने लगे। सोमवार को भी यही गतिरोध जारी रहा, जहां विपक्ष ने मांग की कि प्रश्नकाल रोककर पहले राहुल गांधी को अपनी बात रखने दी जाए।
विपक्ष के गंभीर आरोप और अविश्वास का आधार
विपक्षी गठबंधन (INDIA Bloc) के नेताओं का आरोप है कि सत्ता पक्ष के सांसदों को नियम तोड़ने पर भी बोलने दिया जा रहा है, जबकि विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।
- विपक्ष ने आरोप लगाया कि बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे को पुराने संदर्भों और किताबों को उद्धृत करने की अनुमति मिली, लेकिन विपक्ष पर पाबंदी लगाई गई।
- स्पीकर द्वारा प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर दिए गए हालिया बयानों पर भी विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
- सूत्रों का कहना है कि प्रस्ताव का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है और इस पर जल्द ही औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।
Voices from the Ground / Official Statements
“सदन चर्चा और संवाद के लिए है। मैंने कभी किसी सदस्य को बोलने से नहीं रोका, लेकिन कार्यवाही नियमों के तहत ही चलेगी। प्रश्नकाल के बाद सभी को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।” — ओम बिरला, अध्यक्ष, लोकसभा
संसद की कार्यवाही और आगे की राह
संवैधानिक प्रावधानों के तहत, लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (हटाने का संकल्प) लाने के लिए 14 दिन का पूर्व नोटिस देना अनिवार्य होता है। यदि विपक्ष इस नोटिस को आगे बढ़ाता है, तो सदन में बहुमत परीक्षण जैसी स्थिति बन सकती है। फिलहाल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट पर सामान्य चर्चा होनी है, लेकिन विपक्षी हंगामे के चलते विधायी कार्यों के बाधित होने की पूरी संभावना है। आम नागरिक के लिए इसका सीधा असर यह है कि महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर चर्चा टलती जा रही है।

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