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अनदेखी से आहत अनियमित कर्मचारियों का जंगी प्रदर्शन, आश्वासन की जगह अब आक्रोश

नवा रायपुर, छत्तीसगढ़।

राज्य के शासकीय कार्यालयों में वर्षों से समर्पण और परिश्रम से सेवा दे रहे अनियमित कर्मचारियों का सब्र अब टूटने लगा है। 13 अप्रैल 2025, रविवार को प्रदेश के कोने-कोने से आए 52 अनियमित कर्मचारी संघों के 10,000 से अधिक कर्मचारी तुता, नवा रायपुर में अपनी पीड़ा और उपेक्षा की आवाज बुलंद करने के लिए एकत्र हुए थे। वे अपने नियमितीकरण, बहाली, न्यूनतम वेतन और अन्य मूलभूत अधिकारों को लेकर मुख्यमंत्री निवास घेराव के लिए बढ़े, लेकिन उन्हें रेलवे लाइन के पास ही पुलिस द्वारा रोक दिया गया।

ये वही कर्मचारी हैं, जो सालों से बिना स्थायीत्व के, न्यूनतम वेतन पर, असुरक्षित हालातों में, प्रदेश के हर हिस्से में सरकारी कामकाज को संभाल रहे हैं। लेकिन जब वे अपने हक की बात करने सड़कों पर उतरते हैं, तो आवाज़ को दरकिनार कर दिया जाता है।

भाजपा सरकार के सत्ता में आने से पहले, कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि मंचों पर आकर अनियमित कर्मचारियों की पीड़ा को समझने और समाधान का वादा करते रहे। यहां तक कि “मोदी की गारंटी 2023” पत्र में भी “वचनबद्ध सुशासन” के अंतर्गत समिति गठन का जिक्र था, जिसमें अनियमित कर्मचारियों को शामिल करने का वादा किया गया था। लेकिन गठित समिति में न तो उनकी सहभागिता है और न ही कोई ठोस कदम उठाया गया।

 

आज स्थिति यह है किक ई कर्मचारियों को वेतन महीनों से नहीं मिला,

  • न्यूनतम वेतन 8 वर्षों से नहीं बढ़ाया गया,
  • संविदा वेतन के अनुसार भी भुगतान नहीं हो रहा,
  • श्रम सम्मान राशि भी वंचित है,
  • और कई जगह अचानक छंटनी कर दी गई है।

बार-बार आवेदन, निवेदन, मांगों को शासन तक पहुंचाने के बाद भी यदि केवल अनदेखी और निराशा ही मिले, तो यह कैसा न्याय?

अनियमित संघों के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई, तो जुलाई में वे अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए विवश होंगे।

यह केवल एक प्रदर्शन नहीं था, यह एक संकल्‍प था उन हजारों परिवारों की ओर से, जो हर दिन भविष्य की अनिश्चितता से लड़ते हुए भी, सरकारी व्यवस्था को थामे हुए हैं। अब वे सुनवाई नहीं, समाधान चाहते हैं।

 

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