JNU , नई दिल्ली (JNU) — जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में है। रविवार, 15 फरवरी 2026 की रात JNUSU (जेएनयू छात्र संघ) के कार्यकर्ताओं ने कैंपस के अंदर एक विशाल ‘चेतावनी रैली’ निकाली। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने न केवल केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की, बल्कि ‘ब्राह्मणवाद’ और ‘ठाकुरवाद’ जैसे जातिसूचक शब्दों के खिलाफ भी विवादित नारे लगाए। कैंपस की फिजा एक बार फिर वैचारिक टकराव से गरमा गई है।
यह प्रदर्शन मुख्य रूप से जेएनयू प्रशासन द्वारा छात्र संघ के चार मुख्य पदाधिकारियों (अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपीका बाबू, सचिव सुनील यादव और संयुक्त सचिव दानिश अली) को निलंबित किए जाने के खिलाफ था। प्रशासन ने उन पर लाइब्रेरी में तोड़फोड़ का आरोप लगाया है। इसके अलावा, छात्र UGC (University Grants Commission) के नए नियमों का भी विरोध कर रहे हैं। रैली साबरमती ढाबा से शुरू होकर पूरे कैंपस में घूमी, जिसमें 10 साल बाद पूर्व छात्र नेता कन्हैया कुमार भी छात्रों का समर्थन करने पहुंचे।
“ये नारे किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि एक विचारधारा के खिलाफ हैं। प्रशासन हमें डराने के लिए निलंबन का सहारा ले रहा है, लेकिन छात्र अपनी आवाज उठाना बंद नहीं करेंगे।
“प्रशासन और जनता के बीच का सेतु”
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