JNU Controversy , नई दिल्ली। दिल्ली दंगा-2020 मामले में शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट से खारिज होने के बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में लगाए गए आपत्तिजनक नारों को लेकर सियासी और सामाजिक हलकों में विवाद तेज हो गया है। 5 जनवरी को वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े छात्रों द्वारा “मोदी-शाह तेरी कब्र खुदेगी” जैसे नारे लगाए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद इसे लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।
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इन नारों के विरोध में शनिवार को बजरंग दल की ओर से JNU परिसर के बाहर सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के दिल्ली प्रांत के कई पदाधिकारी शामिल हुए। आयोजन के दौरान VHP के दिल्ली प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने जेएनयू में लगे नारों पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
सुरेंद्र गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ इस तरह के नारे अस्वीकार्य हैं। उन्होंने नारों को देश की लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया और कहा कि जो लोग इस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, उन्हें इसका जवाब मिलेगा। उनके बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
हनुमान चालीसा पाठ के दौरान बजरंग दल और VHP कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसरों में बढ़ते राजनीतिक उग्रवाद पर चिंता जताई और देश की एकता-अखंडता बनाए रखने की बात कही। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि इस तरह के नारे लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी इस प्रकार की बयानबाजी करने से पहले सोचे। दूसरी ओर, वामपंथी छात्र संगठनों का कहना है कि वे अपने विचार अभिव्यक्त करने का अधिकार रखते हैं और किसी भी प्रकार की हिंसा या धमकी का समर्थन नहीं करते। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक इस पूरे मामले पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है।

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