Jawaharlal Nehru , नई दिल्ली। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जुड़े निजी पत्रों और ऐतिहासिक दस्तावेजों को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। बुधवार को संसद और सियासी गलियारों में उस वक्त हलचल मच गई, जब यह सवाल उठा कि नेहरू से संबंधित 51 कार्टन कागजात अब तक सरकार या राष्ट्रीय अभिलेखागार को क्यों नहीं लौटाए गए। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यह केवल दस्तावेजों का मामला नहीं, बल्कि देश की ऐतिहासिक धरोहर और पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।
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केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि वर्षों से नेहरू के निजी पत्र और दस्तावेज कांग्रेस के पास हैं और इन्हें सार्वजनिक अभिलेखों में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जिन दस्तावेजों का संबंध देश के पहले प्रधानमंत्री और आज़ादी के बाद के अहम फैसलों से है, वे किसी एक परिवार या पार्टी की निजी संपत्ति नहीं हो सकते। मंत्री ने सवाल उठाया कि अगर ये दस्तावेज सुरक्षित हैं, तो उन्हें राष्ट्रीय संस्थानों को सौंपने में आपत्ति क्यों है?
इस पूरे विवाद के बीच संस्कृति मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नेहरू के पत्र और दस्तावेज लापता नहीं हैं। मंत्रालय के मुताबिक, ये सभी कागजात सोनिया गांधी के पास सुरक्षित हैं और उनके संरक्षण में रखे गए हैं। हालांकि मंत्रालय के इस बयान के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आया, बल्कि कांग्रेस और बीजेपी के बीच टकराव और तेज हो गया।
मंत्रालय के बयान के बाद लोकसभा में कांग्रेस सांसदों ने जोरदार हंगामा किया। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी इस मुद्दे को बेवजह तूल देकर राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ऐतिहासिक विषयों का इस्तेमाल ध्यान भटकाने और विपक्ष पर दबाव बनाने के लिए कर रही है। हंगामे के चलते कुछ समय तक सदन की कार्यवाही भी बाधित रही।
कांग्रेस की ओर से यह भी दलील दी गई कि नेहरू के कई पत्र और दस्तावेज पहले ही नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी में उपलब्ध हैं और शेष कागजात निजी संग्रह का हिस्सा हैं, जिनकी सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी परिवार निभा रहा है। पार्टी का कहना है कि बीजेपी इस मुद्दे को जानबूझकर सनसनीखेज बना रही है

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