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May 3, 2026

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Jabalpur Cruise Accident : मौत भी न जुदा कर सकी ममता की डोर’ जबलपुर हादसे की शिकार मां-बेटे का एक ही कब्र में अंतिम संस्कार, खजान बस्ती में पसरा सन्नाटा

Jabalpur Cruise Accident : नई दिल्ली/जबलपुर | जबलपुर के बरगी बांध में बीते गुरुवार को हुए भीषण क्रूज हादसे की चीखें अब देश की राजधानी तक पहुंच गई हैं। इस हादसे में जान गंवाने वाले दिल्ली के मसीह परिवार के तीन सदस्यों— मधुर मसीह, उनकी बेटी मैरिना और मासूम नाती त्रिशान (4 वर्ष) के शव जब शनिवार को पश्चिमी दिल्ली के मायापुरी स्थित खजान बस्ती पहुंचे, तो पूरा इलाका फफक पड़ा।

सबसे भावुक पल वह था जब ममता की अटूट डोर का सम्मान करते हुए मां मैरिना और उनके बेटे त्रिशान को एक ही कब्र में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

रेस्क्यू टीम भी देख रह गई थी दंग

हादसे के बाद जब गोताखोरों की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, तो पानी की गहराई में उन्हें एक ऐसा दृश्य दिखा जिसे देख पत्थर दिल भी पिघल जाए।

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  • अंतिम आलिंगन: मैरिना ने अपने 4 साल के बेटे त्रिशान को अपने सीने से इतनी मजबूती से लगा रखा था कि मौत के घंटों बाद भी दोनों के शरीर अलग नहीं हुए थे।

  • लाइफ जैकेट की डोर: मां ने अपनी लाइफ जैकेट के भीतर बच्चे को सुरक्षित करने की कोशिश की थी। गोताखोरों के अनुसार, उन्हें दोनों को अलग करने में काफी संघर्ष करना पड़ा, जिसके बाद परिजनों की इच्छा पर उन्हें एक साथ ही अंतिम विदाई दी गई।

तीन पीढ़ियां एक साथ खत्म

मायापुरी की तंग गलियों में कल (शनिवार) जब एक साथ तीन एंबुलेंस पहुंचीं, तो वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम थीं।

  1. मधुर मसीह (नानी): परिवार की मुखिया, जो अपनी बेटी और नाती-पोतों के साथ छुट्टियां मनाने जबलपुर गई थीं।

  2. मैरिना (मां): जिन्होंने आखिरी सांस तक अपने बच्चे को बचाने की जंग लड़ी।

  3. त्रिशान (पुत्र): मात्र 4 वर्ष का मासूम, जिसकी हंसी अब केवल तस्वीरों में रह गई है।

बच गए पिता और बेटी, पर उजड़ गया संसार

इस भयानक मंजर के बीच मैरिना के पति प्रदीप और उनकी बेटी सिया की जान तो बच गई, लेकिन उनकी आंखों के सामने उनका पूरा संसार उजड़ गया। बदहवास प्रदीप अपनी पत्नी और बेटे की याद में बार-बार अचेत हो रहे थे। स्थानीय चर्च में विशेष प्रार्थना के बाद शवों को कब्रिस्तान ले जाया गया, जहाँ भारी गम और सिसकियों के बीच उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

प्रशासन की लापरवाही पर उठा सवाल

हादसे के बाद यह बात सामने आई है कि तूफान की चेतावनी के बावजूद क्रूज को पानी में उतारा गया था। चश्मदीदों का आरोप है कि लाइफ जैकेट पहनने की अनिवार्यता को गंभीरता से नहीं लिया गया और ऐन वक्त पर जब पानी क्रूज के भीतर भरने लगा, तब जैकेट बांटी गईं, जिससे अफरा-तफरी मच गई।

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