नई दिल्ली: भारत सरकार ने आखिरकार 16 साल के अंतराल के बाद आगामी जनगणना, 2021 के संबंध में एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी कर दी है। कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हुई यह प्रक्रिया अब गति पकड़ रही है, जैसा कि “भारत का राजपत्र” के असाधारण अंक में प्रकाशित केंद्रीय गृह मंत्रालय (भारत के महारजिस्ट्रार का कार्यालय) की अधिसूचना में विस्तृत किया गया है। सोमवार, 16 जून, 2025 को जारी इस अधिसूचना (सं. 2616, का.आ. 2681(अ).) ने जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 3 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पूर्व में 26 मार्च, 2019 को जारी अधिसूचना संख्या जी.एस.आर. 1455(ई) का अधिक्रमण किया है।
इस नई अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वर्ष 2021 की जनगणना का संचालन किया जाएगा। यह घोषणा देश के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि जनगणना के आंकड़े विभिन्न सरकारी योजनाओं के निर्माण, नीतिगत निर्णयों और विकास कार्यक्रमों के लिए आधार प्रदान करते हैं। अनुमान है कि इस पूरी प्रक्रिया पर 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आएगा।
जनगणना का कार्य दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में, 1 अप्रैल, 2026 से 30 सितंबर, 2026 तक घरों की गणना (हाउसलिस्टिंग) की जाएगी। इसके बाद, दूसरे चरण में 9 फरवरी से 1 मार्च, 2027 तक व्यक्तियों की जनगणना (पॉपुलेशन एन्यूमरेशन) चालू होगी। बर्फीले क्षेत्रों के लिए गणना अवधि 30 सितंबर, 2026 की मध्यरात्रि तक निर्धारित की गई है, जबकि शेष भारत में यह 1 मार्च से 28 फरवरी, 2027 की मध्यरात्रि तक होगी।

अधिसूचना में जनगणना के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सीमाओं के परिसीमन से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश भी शामिल हैं। इसमें स्पष्ट किया गया है कि जनगणना के प्रयोजन के लिए, संघ राज्यक्षेत्र जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर, शेष सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रादेशिक क्षेत्रों का परिसीमन 1 मार्च, 2027 को 00:00 बजे से प्रभावी होगा। हालांकि, संघ राज्यक्षेत्र जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए यह समय-सीमा थोड़ी भिन्न होगी; इन विशिष्ट क्षेत्रों के प्रशासनिक सीमाओं का परिसीमन 1 अक्टूबर, 2026 को 00:00 बजे से प्रभावी माना जाएगा।
इस विशाल कार्य को संपन्न करने के लिए एक विस्तृत मानव संसाधन ढांचा तैयार किया जाएगा। लगभग 1 लाख 30 हजार जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति होगी। इसके अतिरिक्त, लगभग 34 लाख प्रगणक नियुक्त किए जाएंगे, जिनके प्रशिक्षण के लिए मास्टर ट्रेनर जनगणना अधिकारी तैयार किए जाएंगे।
इस अधिसूचना पर भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त, मृत्युंजय कुमार नारायण के हस्ताक्षर हैं, जो इस महत्वपूर्ण सरकारी घोषणा को आधिकारिक दर्जा देते हैं। जनगणना देश के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य का एक विस्तृत स्नैपशॉट प्रदान करती है, जिसमें जनसंख्या, साक्षरता दर, लिंगानुपात, व्यवसायिक संरचना और अन्य जनसांख्यिकीय डेटा शामिल होते हैं। इन आंकड़ों का उपयोग भविष्य की योजनाओं और नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे देश के नागरिकों के कल्याण और विकास को सुनिश्चित किया जा सके।
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