क्यों लिया गया यह फैसला?
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। यदि ईरान-इजराइल जंग तेज होती है, तो समुद्री मार्ग (Suez Canal/Hormuz Strait) बाधित हो सकते हैं। इससे कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन टूटने का खतरा है। इसी संभावित संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने इमरजेंसी पावर का उपयोग किया है। कंपनियों से कहा गया है कि वे अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के बजाय अब एलपीजी के उत्पादन को प्राथमिकता दें।
स्थानीय बाजारों पर असर: रायपुर से बिलासपुर तक अलर्ट
छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों जैसे रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में गैस वितरकों को स्टॉक की निगरानी करने को कहा गया है। हालांकि अभी गैस की कोई तात्कालिक कमी नहीं है, लेकिन सरकार का यह कदम ‘बफर स्टॉक’ तैयार करने के लिए है। पचपेड़ी नाका और भनपुरी स्थित बॉटलिंग प्लांटों में काम की गति तेज करने के संकेत मिले हैं।
“वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए हम कोई जोखिम नहीं ले सकते। तेल कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे घरेलू एलपीजी उत्पादन को अपनी अधिकतम क्षमता तक ले जाएं। नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है, आपूर्ति सुचारू रहेगी।”
— मंत्रालय सूत्र, भारत सरकार
फिलहाल आम आदमी के लिए गैस की बुकिंग या डिलीवरी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन प्रशासन ने कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो आने वाले समय में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। स्थानीय कलेक्टर कार्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे गैस एजेंसियों पर नजर रखें ताकि पैनिक बुकिंग (Panic Booking) की स्थिति न बने।

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