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January 15, 2026

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Health Tips : छोटे बदलाव, लंबी उम्र: नींद, आहार और गतिविधि में मामूली सुधार से बढ़ सकता है जीवनकाल

Health Tips :  एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में सामने आया है कि जीवनशैली में छोटे-छोटे सुधार—जैसे रोज़ाना कुछ मिनट तेज चलना, नींद का समय थोड़ा बढ़ाना और आहार में सब्ज़ियों को शामिल करना—जीवनकाल पर बड़ा असर डाल सकते हैं।

शोध के मुताबिक, जिन लोगों की नींद, शारीरिक गतिविधि और आहार की आदतें सबसे खराब हैं, अगर वे नींद में प्रतिदिन सिर्फ पाँच मिनट की बढ़ोतरी करें, तेज चलने जैसी मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि में लगभग दो मिनट जोड़ें और रोज़ाना अतिरिक्त सब्ज़ियाँ लें, तो उनके जीवन में औसतन एक साल तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

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सबसे खराब और सबसे बेहतर जीवनशैली का अंतर

अध्ययन में सबसे खराब जीवनशैली को प्रतिदिन करीब 5 घंटे 30 मिनट की नींद, 10 मिनट से कम शारीरिक गतिविधि और खराब आहार गुणवत्ता के रूप में परिभाषित किया गया।
वहीं, सबसे अनुकूल जीवनशैली—7 से 8 घंटे की नींद, कम से कम : 40 मिनट की मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ आहार—को नौ साल से अधिक की अतिरिक्त जीवन अवधि और बेहतर स्वास्थ्य से जोड़ा गया है।

संयुक्त प्रभाव अधिक प्रभावी

शोधकर्ताओं का कहना है कि नींद, शारीरिक गतिविधि और आहार का संयुक्त प्रभाव, इन तीनों के अलग-अलग प्रभावों के योग से भी अधिक है। उदाहरण के तौर पर, केवल नींद के ज़रिए एक साल का जीवन बढ़ाने के लिए कहीं अधिक समय तक सोने की ज़रूरत पड़ेगी, लेकिन अगर साथ में थोड़ी शारीरिक गतिविधि और आहार में सुधार किया जाए तो कम प्रयास में बड़ा लाभ मिल सकता है।

60 हज़ार लोगों पर अध्ययन

यह अध्ययन यूके, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील और चिली के शोधकर्ताओं की टीम ने किया। इसमें यूके बायोबैंक के लगभग 60,000 प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिनका करीब आठ वर्षों तक फॉलोअप किया गया। कुछ प्रतिभागियों ने कलाई पर पहनने वाले उपकरणों के ज़रिए अपनी शारीरिक गतिविधि को रिकॉर्ड किया।

मौत के खतरे में भी कमी

द लैंसेट में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन के अनुसार, अगर वयस्क लोग हल्की शारीरिक गतिविधि—जैसे तेज़ चलना—में रोज़ाना सिर्फ पाँच मिनट और जोड़ लें, तो मौत का खतरा 10 प्रतिशत तक कम हो सकता है। वहीं, लंबे समय तक बैठने वालों में अगर रोज़ाना बैठने का समय 30 मिनट घटा दिया जाए, तो सभी कारणों से होने वाली मौतों में 7 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ये निष्कर्ष लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए एक व्यावहारिक और टिकाऊ शुरुआती बिंदु प्रदान करते हैं—जहाँ छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।

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