GST Ghee Price , त्योहारों के मौसम में जहां आम जनता को थोड़ी राहत मिली थी, वहीं अब कंपनियों ने उस राहत को खत्म कर दिया है। कुछ ही समय पहले सरकार ने जीएसटी (GST) दरों में कटौती करके रसोई की जरूरी चीजों के दाम कम किए थे। उस समय घी की कीमत करीब ₹30 तक घटाई गई थी, लेकिन अब डेयरी कंपनियों ने फिर से दाम बढ़ा दिए हैं — कुछ ब्रांड्स में ₹90 प्रति लीटर तक का इजाफा देखा गया है।
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डेयरी उत्पादों में फिर महंगाई का असर
जानकारी के अनुसार, अमूल, मादर डेयरी और अन्य प्रमुख ब्रांड्स ने अपने घी और मक्खन के दामों में बढ़ोतरी की है। कंपनियों का तर्क है कि दूध की खरीद कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे घी के उत्पादन की लागत भी बढ़ी है।इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा है, खासकर त्योहारों के समय जब घी की मांग सबसे ज्यादा होती है।
कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई?
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पहले घी की कीमत ₹540 प्रति लीटर तक पहुंची थी,
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GST घटने के बाद यह ₹510 तक आ गई थी,
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अब कंपनियों ने इसे बढ़ाकर ₹600 प्रति लीटर तक कर दिया है।
यानी करीब ₹90 का इजाफा जिसने उपभोक्ताओं का बजट बिगाड़ दिया है।
त्योहारों की खुशियों पर महंगाई का साया
दीपावली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान जब लोग घरों में मिठाइयां और पकवान बनाते हैं, तब घी की खपत तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में घी की कीमतों में बढ़ोतरी से घर का खर्च और भी बढ़ गया है।
कंपनियों का तर्क क्या है?
डेयरी कंपनियों का कहना है कि कच्चे दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते यह कदम जरूरी था।उनके अनुसार, चारा, फीड और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में भी इजाफा हुआ है, जिससे उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है।
सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल
उपभोक्ता संगठन अब सरकार से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर GST दरों में कटौती का फायदा लोगों तक नहीं पहुंचता और कंपनियां मनमाने तरीके से दाम बढ़ाती हैं, तो यह उपभोक्ताओं के साथ धोखा है।
जनता का दर्द – ‘राहत से ज्यादा बोझ बढ़ा’
आम उपभोक्ताओं का कहना है कि “सरकार ने थोड़ी राहत दी थी, पर कंपनियों ने फिर से दाम बढ़ाकर सारी खुशी छीन ली।” सोशल मीडिया पर भी कई लोग इस मुद्दे पर नाराजगी जता रहे हैं।
आगे क्या कदम उठाएगी सरकार?
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इस पर नजर बनाए रखी है। यदि यह साबित होता है कि कंपनियों ने अनुचित लाभ कमाने के लिए दाम बढ़ाए हैं, तो उनके खिलाफ एंटी-प्रॉफिटियरिंग कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।

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