डिस्काउंट का जाल, दवा का धोखा
मामला सीधा नहीं था। हाई-वैल्यू दवा। नाम बड़ा—माउनजारो। कीमत ऊंची। यहीं खेल शुरू हुआ। सूत्रों के मुताबिक, आरोपी ने बाजार में असली प्रोडक्ट जैसा दिखने वाला नकली इंजेक्शन उतारा। पैकेजिंग मिलती-जुलती। दाम कम। और फिर—डीलरों को ऑफर। 28% तक छूट—यह आंकड़ा ही नेटवर्क खड़ा करने का हथियार बना। मेडिकल सप्लाई चेन में ऐसे मार्जिन दुर्लभ होते हैं।
कैसे फैलता है ऐसा नेटवर्क?
इस तरह के रैकेट में छोटे डिस्ट्रीब्यूटर, क्लीनिक सप्लाई चैन और ऑनलाइन चैनल इस्तेमाल किए जाते हैं। एक बार भरोसा बन गया, तो सप्लाई तेजी से फैलती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नकली दवाओं का सबसे बड़ा खतरा यही है—वे दिखने में असली लगती हैं, लेकिन असर अनिश्चित।
जमीनी असर: मरीज सबसे बड़ा शिकार
डायबिटीज के मरीज नियमित दवा पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में नकली इंजेक्शन का इस्तेमाल सीधे स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। सोचिए—मरीज को लगता है इलाज चल रहा है, लेकिन शरीर पर असर नहीं। या उल्टा नुकसान। यही असली खतरा है।

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