आतंकवाद का डर दिखाकर वसूली करोड़ों की रकम
पीड़ित बुजुर्ग को एक कॉल आया, जिसमें सामने वाले ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसी का वरिष्ठ अधिकारी बताया। ठगों ने बुजुर्ग से कहा कि उनके नाम का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी गतिविधियों में हो रहा है। गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें घंटों तक वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा गया। घबराहट में बुजुर्ग ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी, जो करीब 2.25 करोड़ रुपये थी, ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी।
गुजरात से पकड़ा गया बैंक खाता उपलब्ध कराने वाला आरोपी
जांच के दौरान मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने तकनीकी विश्लेषण का सहारा लिया। पुलिस ने गुजरात से किशन भावेशभाई मकवाना नामक आरोपी को दबोचा है। पुलिस के मुताबिक, किशन का काम ठगी के लिए ‘म्यूल अकाउंट्स’ (फर्जी बैंक खाते) तैयार करना था। वह इन खातों को गिरोह के सरगनाओं को उपलब्ध कराता था और बदले में कमीशन लेता था। ठगी की बड़ी रकम किशन द्वारा खोले गए खातों में ही जमा कराई गई थी।
“हमने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके पास से संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं। यह गिरोह मुख्य रूप से बुजुर्गों को अपना निशाना बनाता है। किशन भावेशभाई मकवाना इस चेन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो वित्तीय साक्ष्य मिटाने में मदद करता था।”
— जांच अधिकारी, मुंबई साइबर पुलिस
मुंबई पुलिस ने नागरिकों, विशेषकर सीनियर सिटीजन्स से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल पर विश्वास न करें। याद रखें, कोई भी सरकारी एजेंसी (CBI, ED, या ATS) वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती है और न ही पैसों की मांग करती है। यदि आपको ऐसा कोई कॉल आता है, तो तुरंत 1930 डायल करें या नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें। वर्तमान में आरोपी से पूछताछ जारी है ताकि इस रैकेट के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।

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