“बैंक के भीतर से ही सेंध”: रैकेट का खौफनाक खुलासा
हमें पता चला कि राजकोट पुलिस की साइबर सेल ने जब इस मामले की तहकीकात शुरू की, तो परत-दर-परत राज खुलते गए. फ्रॉड करने वाले सिर्फ़ बाहर के हैकर्स नहीं थे, बल्कि बैंकों के भीतर बैठे गद्दारों ने ही सेंध लगाई थी. ये बैंक अधिकारी फर्जी दस्तावेज़ों (Fake KYC) के आधार पर धड़ल्ले से फर्जी खाते (fictitious accounts) खोल रहे थे. पुलिस ने अब तक ऐसे 85 फर्जी खातों का पता लगाया है, जिनका इस्तेमाल करोड़ों रुपये के काले धन को सफेद करने और साइबर अपराध की रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था |
गिरफ्तार किए गए तीन बैंक अधिकारियों ने कबूल किया कि वे हर फर्जी खाते को खोलने और उसे ऑपरेट करने के लिए फ्रॉडस्टर्स से भारी कमीशन लेते थे. पुलिस ने बताया कि इन फर्जी खातों के ज़रिए करीब 2500 करोड़ रुपये का संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुआ है. यह पैसा सिर्फ़ गुजरात ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों और विदेशों से भी ऑपरेट हो रहे साइबर क्राइम रैकेट से जुड़ा हुआ है |
“यह एक क्लासिक ‘इनसाइडर जॉब’ (Insider Job) है. जब बैंक के ही लोग फ्रॉडस्टर्स से मिल जाएं, तो सुरक्षा का कोई भी सिस्टम उन्हें नहीं रोक सकता. इन बैंक अधिकारियों ने सिर्फ़ बैंक के भरोसे को नहीं तोड़ा, बल्कि देश की आर्थिक सुरक्षा को भी खतरे में डाला है. हमारी जांच अभी जारी है, और भी कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है.”
— वरिष्ठ साइबर क्राइम अधिकारी, राजकोट पुलिस

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