वेतन विसंगति पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामला उन कर्मचारियों से जुड़ा है जो लंबे समय से नियमित पद के अनुरूप वेतन और सेवा लाभ की मांग कर रहे थे। सुनवाई के दौरान कर्मचारियों की ओर से कहा गया कि वे लगातार जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी वेतन संरचना नहीं मिल रही।
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन को निर्देश दिया कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर जल्द फैसला लिया जाए। कोर्ट ने साफ संकेत दिए कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों के साथ वेतन के मामले में असमानता उचित नहीं मानी जा सकती। कोर्ट रूम में सुनवाई के दौरान कर्मचारियों के चेहरे पर उम्मीद साफ दिखाई दे रही थी। कई कर्मचारी वर्षों से इस फैसले का इंतजार कर रहे थे। बाहर निकलते वक्त कुछ कर्मचारियों ने इसे “लंबी लड़ाई में राहत की शुरुआत” बताया।
कर्मचारियों की मांग क्या है?
- नियमित पद के अनुरूप वेतनमान लागू किया जाए
- सेवा अवधि के आधार पर लाभ दिए जाएं
- वेतन भुगतान में देरी खत्म हो
- नियमितीकरण प्रक्रिया स्पष्ट की जाए
यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से अभी विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि कोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है।

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