नई दिल्ली : चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का आज आठवां दिन है। देशभर में श्रद्धालु पूरे विधि-विधान के साथ महाअष्टमी (Durga Ashtami) मना रहे हैं। मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व होता है क्योंकि इसी दिन मां महागौरी की पूजा और कन्या पूजन किया जाता है।
अक्सर व्यस्तता या अनजाने में पूजा की विधि में कुछ चूक या गलतियाँ रह जाती हैं। शास्त्रों के अनुसार, यदि अष्टमी की पूजा में कोई कमी रह गई हो, तो आज रात एक विशेष स्तोत्र का पाठ करने से अधूरी पूजा भी पूर्ण मानी जाती है और माता रानी का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
‘देव्यपराधक्षमापण स्तोत्रम्’ का महत्व
ज्योतिषियों और धर्मगुरुओं के अनुसार, अष्टमी की रात को ‘देव्यपराधक्षमापण स्तोत्रम्’ का पाठ करना अत्यंत लाभकारी है। आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा रचित यह स्तोत्र मां दुर्गा से अपनी गलतियों की क्षमा मांगने का सबसे सशक्त माध्यम माना जाता है।
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अधूरी पूजा की पूर्णता: यदि आपने व्रत या हवन में कोई मंत्र गलत पढ़ा हो या विधि छूट गई हो, तो यह पाठ उसे संतुलित करता है।
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नकारात्मकता का नाश: रात के समय शांत मन से किया गया यह पाठ घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
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मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से क्षमा मांगकर की गई प्रार्थना से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं।
आज रात कैसे करें पाठ?
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रात को हाथ-पैर धोकर शुद्ध अवस्था में माता की प्रतिमा या ज्योत के सामने बैठें।
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घी का दीपक जलाएं और लाल पुष्प अर्पित करें।
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पूर्ण श्रद्धा के साथ ‘देव्यपराधक्षमापण स्तोत्रम्’ का सस्वर पाठ करें।
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अंत में माता की आरती करें और हलवे-चने का भोग लगाएं।

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