नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों का व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव माना गया है। वैदिक ज्योतिष में ग्रहों से संबंधित रत्न, उपरत्न और धातु धारण करने की परंपरा है। मान्यता है कि कुंडली में किसी ग्रह की स्थिति कमजोर होने पर उससे संबंधित रत्न धारण किया जा सकता है। हालांकि, रत्न पहनने से पहले कुंडली का विश्लेषण कराने की सलाह दी जाती है, क्योंकि गलत रत्न धारण करने से विपरीत प्रभाव की मान्यता भी है।
सूर्य के लिए माणिक्य
सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व और प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है। सूर्य से संबंधित प्रमुख रत्न माणिक्य (Ruby) है। इसके उपरत्न में लालड़ी या रेड गार्नेट का उल्लेख मिलता है। सूर्य के लिए सोना या तांबा धातु परंपरागत रूप से शुभ माना जाता है।
चंद्रमा के लिए मोती
चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक शांति से जोड़ा जाता है। इसका प्रमुख रत्न मोती (Pearl) माना जाता है। उपरत्न के रूप में मूनस्टोन का इस्तेमाल किया जाता है। चंद्रमा के लिए चांदी प्रमुख धातु मानी जाती है।
मंगल के लिए मूंगा
मंगल साहस, ऊर्जा और पराक्रम का प्रतिनिधि ग्रह माना जाता है। इसका प्रमुख रत्न लाल मूंगा (Red Coral) है। इसके उपरत्न में लाल अगेट का उल्लेख किया जाता है। मंगल के लिए तांबा धातु से जुड़ी मान्यता है।
बुध के लिए पन्ना
बुध को बुद्धि, वाणी, शिक्षा और व्यापार का कारक माना जाता है। इसका प्रमुख रत्न पन्ना (Emerald) है। उपरत्न के तौर पर ग्रीन ओनिक्स या पेरिडॉट का उपयोग बताया जाता है। बुध से संबंधित धातु कांसा मानी जाती है।
गुरु के लिए पुखराज
बृहस्पति यानी गुरु को ज्ञान, शिक्षा, विवाह और समृद्धि से जोड़ा जाता है। इसका प्रमुख रत्न पीला पुखराज (Yellow Sapphire) है। उपरत्न में सिट्रीन का उल्लेख मिलता है। गुरु के लिए सोना धातु शुभ मानी जाती है।
शुक्र के लिए हीरा
शुक्र को प्रेम, सौंदर्य, सुख-सुविधा और कला का कारक माना जाता है। इसका प्रमुख रत्न हीरा (Diamond) है। इसके विकल्प के रूप में सफेद पुखराज या ओपल का उल्लेख मिलता है। शुक्र के लिए चांदी या प्लैटिनम से जुड़ी मान्यताएं हैं।
शनि के लिए नीलम
शनि को कर्म, अनुशासन और न्याय का ग्रह माना जाता है। इसका प्रमुख रत्न नीलम (Blue Sapphire) है। उपरत्न के रूप में अमेथिस्ट या नीली उपरत्न श्रेणी के पत्थरों का उल्लेख किया जाता है। शनि के लिए लोहा प्रमुख धातु मानी जाती है।
राहु के लिए गोमेद
राहु को छाया ग्रह माना जाता है। इसका प्रमुख रत्न गोमेद (Hessonite Garnet) है। इसके उपरत्न के रूप में कुछ परंपराओं में सिट्रीन या अन्य गार्नेट बताए जाते हैं। राहु के लिए पंचधातु या चांदी का प्रयोग कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में किया जाता है।
केतु के लिए लहसुनिया
केतु का प्रमुख रत्न लहसुनिया (Cat’s Eye) माना जाता है। उपरत्न के रूप में क्वार्ट्ज कैट्स-आई का उल्लेख मिलता है। केतु के लिए चांदी या पंचधातु में रत्न धारण करने की परंपरा बताई जाती है।

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