- सबसे सख्त सजा: सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में अब उम्रकैद तक का प्रावधान है।
- भारी जुर्माना: दोषी पाए जाने पर न्यूनतम ₹5 लाख से ₹25 लाख तक का आर्थिक दंड लगेगा।
- विवाह अवैध: केवल शादी के मकसद से किया गया धर्म परिवर्तन अब कानूनी रूप से ‘शून्य’ (Void) माना जाएगा।
CG Religious Freedom Bill 2026 , रायपुर — छत्तीसगढ़ विधानसभा ने आज एक ऐतिहासिक और कड़ा विधायी कदम उठाते हुए ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ को हरी झंडी दे दी है। साय सरकार ने इस कानून के जरिए अवैध और जबरन धर्मांतरण पर लगाम कसने के लिए देश के सबसे सख्त प्रावधानों में से एक को लागू किया है। अब राज्य में भय, लालच या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने वालों को न केवल लंबी जेल काटनी होगी, बल्कि उनकी मदद करने वाले संस्थान और व्यक्ति भी कानून के दायरे में आएंगे।
नया कानून: सजा और जुर्माने का पूरा गणित
विधानसभा में पारित इस विधेयक ने पुराने नियमों को पूरी तरह बदल दिया है। नए प्रावधानों के तहत अपराध की गंभीरता के आधार पर सजा को वर्गीकृत किया गया है। सामूहिक धर्मांतरण (दो या दो से अधिक व्यक्ति) कराने पर सजा की सीमा 7 से 10 साल तय की गई है, जबकि विशेष परिस्थितियों में इसे उम्रकैद तक बढ़ाया जा सकता है।
- सामूहिक धर्मांतरण: न्यूनतम 7 साल, अधिकतम 10 साल की जेल और ₹5 लाख जुर्माना।
- मददगारों पर नकेल: धर्मांतरण में वित्तीय या अन्य सहायता देने वाली संस्थाओं का पंजीकरण रद्द होगा और उन्हें भी जेल जाना होगा।
- धर्म छिपाकर शादी: यदि कोई व्यक्ति अपनी पहचान छिपाकर या केवल विवाह के लिए धर्म बदलता है, तो वह शादी कानूनन अमान्य होगी।
विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे अब 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देनी होगी। इसके बिना किया गया कोई भी धर्मांतरण अवैध माना जाएगा और उस पर कानूनी कार्रवाई होगी।
“यह विधेयक छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता और भोली-भाली जनता को सुरक्षा देने के लिए लाया गया है। छल-कपट से होने वाले धर्मांतरण को अब राज्य में कोई जगह नहीं मिलेगी। हम स्पष्ट कर रहे हैं कि जबरन धर्मांतरण एक गंभीर अपराध है और इसकी सजा भी उतनी ही कठोर होगी।”
— विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

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