CG News : रायपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर मंथन का दौर जारी है। इसी क्रम में UCC पर आयोजित बैठक में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और समान नागरिक संहिता को लेकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव समिति के सामने रखे। बैठक में अलग-अलग वर्गों और समुदायों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य देश में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों से जुड़े कानूनों में समानता स्थापित करना है। छत्तीसगढ़ में भी इस विषय को लेकर सरकार की ओर से व्यापक स्तर पर सुझाव और राय जुटाने की प्रक्रिया चल रही है।
सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से मांगी गई राय
बैठक के दौरान सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों से UCC के संभावित प्रावधानों और उनके प्रभाव को लेकर सुझाव लिए गए। प्रतिनिधियों ने अपने-अपने अनुभव और विचार साझा करते हुए कानून लागू करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय रखी।
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बैठक में यह भी चर्चा हुई कि समान नागरिक संहिता तैयार करते समय समाज के अलग-अलग वर्गों की परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना जरूरी है।
UCC को लेकर समिति कर रही मंथन
छत्तीसगढ़ सरकार ने समान नागरिक संहिता को लेकर विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। समिति का उद्देश्य प्रदेश में UCC को लेकर विभिन्न पक्षों की राय और सुझावों का अध्ययन करना है।
समिति सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श कर रही है। प्राप्त सुझावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया को लेकर मंथन किया जाएगा।
किन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा?
समान नागरिक संहिता के दायरे में व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय आते हैं। इनमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के अधिकार, गोद लेना और पारिवारिक कानून जैसे विषय शामिल हैं।
बैठक में प्रतिनिधियों ने इन विषयों से जुड़े संभावित बदलावों और उनके सामाजिक प्रभाव पर भी अपनी राय रखी। अलग-अलग संगठनों के सुझावों को समिति की आगामी रिपोर्ट और प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
सभी वर्गों की राय पर जोर
UCC जैसे संवेदनशील और व्यापक प्रभाव वाले विषय पर सभी संबंधित पक्षों की राय लेना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समिति की ओर से अलग-अलग सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों से चर्चा कर उनके विचार जानने की प्रक्रिया इसी दिशा में एक कदम है।
सरकार की कोशिश है कि इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही आगे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। इससे कानून से जुड़े संभावित प्रावधानों को लेकर विभिन्न वर्गों की चिंताओं और सुझावों को समझने में मदद मिलेगी।

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