रायपुर: छत्तीसगढ़ में अपना घर बनाने या जमीन खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने होली से पहले एक बड़ा तोहफा दिया है। शुक्रवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने ‘छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस फैसले के बाद अब अचल संपत्ति (जमीन, मकान, दुकान) की रजिस्ट्री पर लगने वाला 0.60% अतिरिक्त सेस (Cess) पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
आम आदमी की जेब पर पड़ेगा सीधा असर
अभी तक छत्तीसगढ़ में किसी भी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराते समय कुल मूल्य पर 0.60 प्रतिशत का अतिरिक्त उपकर (सेस) देना पड़ता था। सुनने में यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन लाखों-करोड़ों की जमीन या मकान की खरीद पर यह हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ डालता था।
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उदाहरण के तौर पर समझें: * यदि आप ₹50 लाख का घर या प्लॉट खरीदते हैं, तो पहले आपको ₹30,000 अतिरिक्त सेस देना पड़ता था।
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अब यह ₹30,000 आपके सीधे बचेंगे, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों के बजट को बड़ी राहत मिलेगी।
रियल एस्टेट और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि सेस खत्म होने से छत्तीसगढ़ के रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी आएगी।
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निवेशकों का रुझान: रजिस्ट्री की लागत कम होने से लोग जमीन और मकान में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
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किसानों को राहत: ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री करने वाले किसानों को भी अब कम सरकारी शुल्क देना होगा।
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पारदर्शिता: शुल्क कम होने से रजिस्ट्री के प्रति लोगों की रुचि बढ़ेगी, जिससे सरकार को मिलने वाले स्टाम्प ड्यूटी राजस्व में भी लंबी अवधि में वृद्धि हो सकती है।

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