बिलासपुर: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कोरोना काल में स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के हक में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल सरकारी ही नहीं, बल्कि निजी संस्थाओं (आउटसोर्सिंग) के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं देने वाले कर्मचारी भी नई भर्तियों में बोनस अंकों के हकदार होंगे। इस फैसले से प्रदेश के हजारों संविदा और आउटसोर्स कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला एक याचिकाकर्ता द्वारा दायर किया गया था, जिसे स्वास्थ्य विभाग की नई भर्ती प्रक्रिया में बोनस अंक देने से मना कर दिया गया था। प्रशासन का तर्क था कि अभ्यर्थी ने एक निजी संस्था (Placeemnt Agency) के माध्यम से काम किया था, इसलिए वह शासन की ‘बोनस अंक नीति’ के दायरे में नहीं आता। याचिकाकर्ता ने इस भेदभाव को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की शरण ली थी।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी और आदेश
मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस की बेंच ने शासन के तर्क को खारिज करते हुए कहा:
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सेवा का महत्व: कोरोना काल में सेवा देने वाले हर कर्मचारी का योगदान महत्वपूर्ण था, चाहे वह सीधे सरकारी रोल पर हो या किसी निजी एजेंसी के माध्यम से।
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समानता का अधिकार: निजी संस्था के माध्यम से विभाग में काम करना किसी भी कर्मचारी को उसके लाभों से वंचित करने का आधार नहीं हो सकता।
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60 दिनों में नियुक्ति: कोर्ट ने शासन को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ता को नियमानुसार बोनस अंक प्रदान किए जाएं और पात्रता के आधार पर 60 दिनों के भीतर नियुक्ति आदेश जारी किया जाए।
भर्तियों पर पड़ेगा व्यापक असर
छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व में घोषणा की थी कि कोरोना काल में न्यूनतम 6 महीने तक सेवा देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को सीधी भर्ती में 10 से 15 बोनस अंक दिए जाएंगे। अब हाईकोर्ट के इस नए आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग को अपनी चयन सूचियों (Merit Lists) में बदलाव करना होगा, जिससे उन युवाओं को फायदा मिलेगा जो अब तक तकनीकी कारणों से बाहर थे।

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