CG Engineering Seats Reduced : रायपुर। छत्तीसगढ़ में तकनीकी शिक्षा का दायरा लगातार सिमटता नजर आ रहा है। एक समय जहां प्रदेश में 38 इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित होते थे, वहीं अब इनकी संख्या और घटने जा रही है। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने तीन इंजीनियरिंग कॉलेजों के प्रोग्रेसिव क्लोजर को मंजूरी दे दी है।
इन कॉलेजों पर गिरी गाज
निर्णय के तहत छत्तीसगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज धनोरा (दुर्ग), कोलंबिया इंस्टीट्यूट (रायपुर) और कृष्णा विकास इंजीनियरिंग कॉलेज (रायपुर) नए शैक्षणिक सत्र से प्रवेश प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। इन संस्थानों ने स्वयं ही सीट इनटेक शून्य करने का प्रस्ताव दिया था, जिसे स्वीकृति मिल गई है। अब ये कॉलेज डीटीई की काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे और प्रथम वर्ष में नए छात्रों को प्रवेश नहीं दे सकेंगे।
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1000 सीटें होंगी कम
इस फैसले से प्रदेश में इंजीनियरिंग की करीब 1000 सीटें कम हो जाएंगी, जिससे तकनीकी शिक्षा के अवसरों पर सीधा असर पड़ेगा। हालांकि, जानकारी के अनुसार इनमें से दो संस्थानों के निजी विश्वविद्यालय में परिवर्तित होने की संभावना भी जताई जा रही है।
एक और कॉलेज पूरी तरह बंद
कार्यपरिषद ने राजनांदगांव के योगांतर इंजीनियरिंग कॉलेज को पूर्ण रूप से बंद करने की अनुमति भी दे दी है। यहां पढ़ रहे छात्रों को सीएसवीटीयू की निगरानी में अन्य कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय विशेष काउंसलिंग आयोजित करेगा, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
निरीक्षण में मिली गंभीर खामियां
संबद्धता निरीक्षण के दौरान अहिवारा के आईबीटी पॉलिटेक्निक, मनसा पॉलिटेक्निक और मेदुका स्थित आयुष पॉलिटेक्निक में कई गंभीर कमियां पाई गईं। जांच में शिक्षकों की कमी, प्रयोगशालाओं का अभाव समेत 33 से अधिक खामियां सामने आईं।
जीरो इनटेक का आदेश
इन खामियों को देखते हुए इन तीनों पॉलिटेक्निक संस्थानों को इस वर्ष के लिए जीरो इनटेक घोषित कर दिया गया है। यानी ये संस्थान नए छात्रों को प्रवेश नहीं दे सकेंगे। साथ ही उन्हें एक वर्ष के भीतर सभी कमियां दूर कर पुनः आवेदन करने के निर्देश दिए गए हैं।
लगातार बंद होते कॉलेज और घटती सीटें यह संकेत दे रही हैं कि प्रदेश में तकनीकी शिक्षा की स्थिति चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। अब जरूरत है कि गुणवत्ता सुधार के साथ शिक्षा के अवसरों को भी बनाए रखा जाए।

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