रायपुर | छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सदन में भारी हंगामा हुआ। स्कूलों के युक्तियुक्करण (Rationalization), अतिथि शिक्षकों की भर्ती, वेतन और नियमितीकरण जैसे मुद्दों पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव चौतरफा घिर गए। खास बात यह रही कि मंत्री को न केवल विपक्ष, बल्कि सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायकों के तीखे सवालों का भी सामना करना पड़ा।
सदन की कार्यवाही के मुख्य बिंदु:
-
अपनों ने उठाए सवाल: भाजपा विधायक राजेश मूणत, सुनील सोनी और रोहित साहू ने स्कूलों की बदहाल स्थिति पर अपनी ही सरकार के मंत्री को घेरा।
-
मूणत का तीखा प्रहार: पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने कहा कि युक्तियुक्करण के बाद स्कूलों की स्थिति दयनीय है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मैंने स्वयं स्कूलों के लिए दरी खरीद कर दी है, शिकायत के बाद भी अधिकारी परीक्षण करने नहीं पहुंचे।”
-
आसंदी का कड़ा रुख: हंगामे और शिकायतों को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष (आसंदी) ने शिक्षा मंत्री को 30 मार्च 2026 तक प्रदेश के सभी स्कूलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
विपक्ष का वॉकआउट
अतिथि शिक्षकों के वेतन और नियमितीकरण के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। शिक्षा मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार शिक्षा के बुनियादी ढांचे और शिक्षकों के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है।
मंत्री का आश्वासन
विधायक राजेश मूणत के आरोपों पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि विभाग स्थिति का परीक्षण करा रहा है। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि जहां भी विसंगतियां पाई जाएंगी, उन्हें दूर किया जाएगा। हालांकि, सत्ता पक्ष के ही विधायकों के असंतोष ने विभाग की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है।

More Stories
महंगाई के बीच राहत: छत्तीसगढ़ में बिजली बिल आधा, लाखों उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा
NEET UG 2026 में बड़ी लापरवाही : गलत सेंटर बताकर छात्र को लौटाया, रायपुर में हंगामा; जगदलपुर में भी प्रदर्शन
अभनपुर में Rahul Gandhi का प्रशिक्षण शिविर: जिला अध्यक्षों से सीधा संवाद, सियासी बयानबाजी भी तेज