National Digital Registry – दिल्ली:,सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम— देश की अदालतों में वकालत की आड़ में चल रहे फर्जीवाड़े पर अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वकालत पेशे में बड़ी संख्या में फर्जी वकील सक्रिय हैं। इसी गंभीर मुद्दे को संज्ञान में लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के वकीलों के लिए एक ‘राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री’ बनाने की याचिका पर सुनवाई का फैसला किया है।

क्या है पूरा मामला?
देश भर की अदालतों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग प्रैक्टिस कर रहे हैं जिनके पास वैध डिग्री या बार काउंसिल का पंजीकरण नहीं है। बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया का दावा है कि हर तीन में से एक वकील फर्जी हो सकता है। यह न केवल कानूनी पेशे की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि आम नागरिकों के न्याय पाने के अधिकार को भी प्रभावित कर रहा है। फर्जी वकीलों के कारण कई बार मुवक्किलों को भारी आर्थिक और कानूनी नुकसान उठाना पड़ता है।
डिजिटल रजिस्ट्री से कैसे रुकेगी धोखाधड़ी?
याचिका में मांग की गई है कि प्रत्येक नामांकित वकील को एक ‘अद्वितीय राष्ट्रीय वकील पहचानकर्ता’ (Unique National Lawyer Identifier) जारी किया जाए। यह सिस्टम काफी हद तक सरकारी डिजिटल डेटाबेस जैसा होगा, जिससे किसी भी वकील की डिग्री, एनरोलमेंट नंबर और लाइसेंस की वैधता का तुरंत सत्यापन किया जा सकेगा। इससे अदालतों में फर्जी वकीलों की घुसपैठ पर तत्काल रोक लगाना संभव होगा।
आम नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा?
इस रजिस्ट्री के लागू होने से मुवक्किलों को किसी भी वकील की विश्वसनीयता जांचने में आसानी होगी। भविष्य में, कोई भी नागरिक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए देख सकेगा कि उसका वकील बार काउंसिल में पंजीकृत है या नहीं। इससे कानूनी धोखाधड़ी के मामलों में भारी कमी आने की उम्मीद है। अभी के लिए, बार काउंसिल और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है, जिसके बाद कोर्ट इस पर अगली सुनवाई की तारीख तय करेगा।

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